रिपोर्ट: राहुल द्विवेदी, ब्यूरो चीफ (कानपुर)
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर में कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा आपराधिक मामलों के वैज्ञानिक निस्तारण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पुलिस उपायुक्त (सेंट्रल) अतुल कुमार श्रीवास्तव ने आज, 13 मई 2026 को सेंट्रल जोन कार्यालय में विवेचकों के साथ एक विशेष समीक्षा बैठक सह कार्यशाला (गोष्ठी) का आयोजन किया।
ई-साक्ष्य पोर्टल और डिजिटल पारदर्शिता पर फोकस
बैठक का मुख्य केंद्र आधुनिक तकनीक के माध्यम से न्याय प्रक्रिया को गति देना रहा। डीसीपी सेंट्रल ने ई-साक्ष्य (e-Sakshya) पोर्टल के प्रभावी उपयोग को लेकर कड़े निर्देश जारी किए। बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा की गई:
SID क्रिएशन और FIR लिंकिंग: डीसीपी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि ई-साक्ष्य पोर्टल पर शत-प्रतिशत एसआईडी (SID) जनरेट की जाए और उसे संबंधित एफआईआर से तत्काल लिंक किया जाए।
डिजिटल साक्ष्य अपलोडिंग: क्राइम सीन से लेकर जांच के दौरान एकत्र किए गए सभी डिजिटल साक्ष्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
लंबित प्रकरणों का निस्तारण: काफी समय से लंबित चल रहे विवेचनाओं की समीक्षा करते हुए, उन्हें गुणवत्तापूर्ण ढंग से जल्द समाप्त करने के निर्देश दिए गए।
विवेचकों की उपस्थिति और ‘संकल्प’
इस महत्वपूर्ण गोष्ठी में सेंट्रल जोन के समस्त विवेचकगण उपस्थित रहे। डीसीपी अतुल कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि आधुनिक पुलिसिंग में तकनीक का सही उपयोग न केवल अपराधों की गुत्थी सुलझाने में सहायक है, बल्कि यह न्याय प्रणाली में पारदर्शिता भी सुनिश्चित करता है।
“हम एक अपराधमुक्त समाज के निर्माण के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध हैं। साक्ष्यों के संकलन में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” — अतुल कुमार श्रीवास्तव, डीसीपी सेंट्रल
निष्कर्ष
इस बैठक से स्पष्ट है कि कानपुर पुलिस अब पारंपरिक जांच के साथ-साथ डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा और उनके ऑनलाइन दस्तावेजीकरण को लेकर बेहद गंभीर है। इससे आने वाले समय में न्यायालयों में साक्ष्यों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और अपराधियों को सजा दिलाने में तेजी आएगी।








