फतेहपुर। जनपद में मौरंग माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने न केवल सरकारी राजस्व को ठेंगा दिखाया है, बल्कि कुदरत के साथ भी खिलवाड़ शुरू कर दिया है। ललौली थाना क्षेत्र के अढावल खंड संख्या 2 और 11 में मौरंग माफियाओं की मनमानी चरम पर है। यहाँ यमुना नदी के बीचों-बीच अवैध रूप से ‘बंधा’ लगाकर जलधारा को तालाब में तब्दील कर दिया गया है, ताकि मशीनों के जरिए नदी का सीना चीरकर मौरंग निकाली जा सके।
पट्टे की आड़ में किसानों की ज़मीन पर डाका
हैरानी की बात यह है कि अढावल खंड संख्या 2 में पट्टा क्षेत्र की सीमाओं को लांघकर माफिया अब किसानों की निजी भूमिधरी ज़मीन पर अवैध खनन कर रहे हैं। इस अवैध खेल से उत्तर प्रदेश सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व की चपत लग रही है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें डराया-धमकाया जाता है, जबकि राजस्व विभाग के जिम्मेदार चुप्पी साधे बैठे हैं।
ओवरलोडिंग का ‘ग्रीन कॉरिडोर’
एनजीटी (NGT) के नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए इन खदानों से ही सीधे ओवरलोड वाहनों को रवाना किया जा रहा है। दिखावे के लिए सीसीटीवी कैमरे और ऑनलाइन निगरानी का दावा करने वाला प्रशासन ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर नज़र आ रहा है। सूत्रों की मानें तो विभाग, पुलिस और राजस्व कर्मियों के बीच हर महीने लाखों की ‘नजरानी’ बांटी जा रही है, जिसके बदले माफियाओं को ओवरलोडिंग का ‘ग्रीन कॉरिडोर’ मुहैया कराया जाता है।
उच्चाधिकारियों को दी जा रही है गलत रिपोर्टिंग
सूत्रों का दावा है कि जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स और पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक को उनके मातहतों द्वारा गुमराह किया जा रहा है। मौके पर बड़ी-बड़ी डील के चलते मातहत अधिकारी उच्चाधिकारियों तक आधी-अधूरी और भ्रामक जानकारी पहुंचा रहे हैं, जिससे ज़िले में अवैध खनन और ओवरलोडिंग का काला कारोबार बिना किसी रोक-टोक के फल-फूल रहा है।
सत्ताधारियों की चुप्पी पर सवाल
कभी अवैध खनन को मुद्दा बनाने वाले सत्ताधारी दल के नेता भी इस समय मौन धारण किए हुए हैं। ‘खादी’ और ‘खाकी’ के इस कथित गठजोड़ ने जनता के बीच सरकार की छवि पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। आखिर क्या वजह है कि रक्षक ही भक्षक बने बैठे हैं?








