फतेहपुर/बांदा। क्या प्रशासन को किसी महा-दुर्घटना का इंतज़ार है? यह सवाल आज असोथर की जनता पूछ रही है। बांदा के मर्का खण्ड संख्या 3 से मौरंग की जो निकासी हो रही है, उसने नियम-कानूनों को मजाक बना कर रख दिया है। मौरंग लदे ओवरलोड ट्रक आज आम आदमी के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं।
तौल कांटों को ठेंगा, माफियाओं का बोलबाला
हकीकत यह है कि मर्का खण्ड-3 से निकलने वाले अधिकांश ट्रकों का वजन तक नहीं किया जा रहा। बिना तौल के मौरंग निकालने का यह ‘शॉर्टकट’ माफियाओं की जेबें तो भर रहा है, लेकिन सड़कों का सीना छलनी कर रहा है। मानक से दोगुना भार लेकर जब ये ट्रक फतेहपुर के असोथर थाना क्षेत्र की सड़कों पर उतरते हैं, तो सड़क सुरक्षा के सारे दावे धराशायी हो जाते हैं।
असोथर की सड़कों पर ‘यमराज’ का पहरा
असोथर क्षेत्र में आए दिन हो रहे हादसे कोई संयोग नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा हैं। तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग का ऐसा ‘कॉकटेल’ तैयार किया गया है, जिसकी कीमत निर्दोष राहगीरों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है। सड़कों पर उड़ती धूल और पीछे दौड़ते काल रूपी ट्रक अब इस इलाके की पहचान बन चुके हैं।
प्रशासनिक कुंभकर्णी नींद पर सवाल
आखिर क्यों मर्का खण्ड-3 पर उड़ते नियमों के मखौल को अधिकारी अनदेखा कर रहे हैं?
असोथर थाना क्षेत्र में ओवरलोडिंग के खिलाफ सख्त अभियान क्यों नहीं चलाया जाता?
क्या मौरंग माफियाओं के रसूख के आगे शासन की जीरो टॉलरेंस नीति दम तोड़ चुकी है?
महँगी मौरंग, सस्ती जान
आज हालात ये हैं कि मौरंग की एक-एक बोरी की कीमत तो तय है, लेकिन असोथर की सड़कों पर चलने वाले इंसान की जान की कोई कीमत नहीं रह गई है। अगर जल्द ही इन ‘खूनी ट्रकों’ पर लगाम नहीं कसी गई, तो प्रशासन को जनता के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है।








