फतेहपुर | संवाददाता
खागा तहसील क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए पीड़ित परिवार अपनी मांगों को लेकर पिछले तीन दिनों से कलेक्ट्रेट गेट पर अनवरत धरने पर बैठे हैं। शुक्रवार को धरने के तीसरे दिन प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर पीड़ितों की समस्याएं सुनीं, जिसके बाद पीड़ितों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपकर त्वरित कार्रवाई की गुहार लगाई।
मामला 1: बैनामा शुदा जमीन पर दबंग का कब्जा, न्याय की मांग
सरसाई मजरे अडार के निवासी पप्पू पुत्र घनश्याम ने अधिकारियों को बताया कि उन्होंने 19 अप्रैल 2023 को ग्राम टेनी संपूर्ण मार्ग पर स्थित गाटा संख्या 24 (रकबा 0.3240 हेक्टेयर) का बैनामा पृथ्वी पाल से कराया था। पीड़ित का आरोप है कि इस भूमि पर किशनपुर रोड निवासी एक व्यक्ति ने दबंगई के बल पर अवैध कब्जा कर रखा है।
पीड़ित का दर्द: पप्पू का कहना है कि उन्होंने तहसील से लेकर जिले के आलाधिकारियों तक कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक जमीन कब्जा मुक्त नहीं हो सकी। थक-हारकर उन्हें धरने का रास्ता चुनना पड़ा।
मामला 2: 33 साल बाद पिता ‘मृत’ घोषित, अब कोटे की दुकान के लिए संघर्ष
दरियामऊ निवासी रावेन्द्र कुमार सोनकर की कहानी और भी व्यथित करने वाली है। रावेन्द्र ने बताया कि उनके पिता वृन्दावन सोनकर गांव के कोटेदार थे, जो 13 अक्टूबर 1993 को किशनपुर गल्ला मंडी से राशन लेने गए थे और तब से लापता हैं।
लंबी कानूनी लड़ाई: पिता के लापता होने के बाद कोटे की दुकान दूसरे व्यक्ति को आवंटित कर दी गई थी। रावेन्द्र ने बालिग होने पर 2016 में अनुकंपा के आधार पर दुकान की मांग की थी।
ताजा स्थिति: सिविल कोर्ट के आदेश पर 31 मार्च 2026 को उनके पिता को आधिकारिक रूप से मृतक घोषित कर दिया गया है। रावेन्द्र का कहना है कि वह बेरोजगार हैं और उनके पास आय का कोई साधन नहीं है, इसलिए न्याय हित में जांच कराकर उन्हें कोटे की दुकान वरासतन आवंटित की जाए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने पीड़ितों के ज्ञापन स्वीकार करते हुए उन्हें उचित जांच और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि, पीड़ितों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
मुख्य बिंदु:
धरना स्थल: कलेक्ट्रेट गेट, फतेहपुर।
मुख्य मांगें: जमीन को कब्जा मुक्त कराना और अनुकंपा के आधार पर राशन की दुकान का आवंटन।
प्रभावित क्षेत्र: सरसाई (अडार), टेनी और दरियामऊ।








