रिपोर्ट: राहुल द्विवेदी, ब्यूरो चीफ (कानपुर)
कानपुर। साइबर अपराध के बढ़ते खतरों के बीच मध्य प्रदेश की देवास पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। देवास पुलिस ने कानपुर के बर्रा थाना क्षेत्र से तीन युवकों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने एक महिला को 10 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर उससे 54 लाख रुपये की मोटी रकम ठग ली थी।
क्या है पूरा मामला?
देवास की रहने वाली एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ साइबर ठगों ने खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर उसे डराया-धमकाया और करीब 10 दिनों तक वीडियो कॉल के जरिए निगरानी (डिजिटल अरेस्ट) में रखा। कानूनी कार्रवाई का खौफ दिखाकर आरोपियों ने पीड़िता से अलग-अलग किस्तों में कुल 54 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
कानपुर में दबिश और गिरफ्तारी
पीड़िता की शिकायत पर देवास कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था। तकनीकी जांच और बैंक ट्रांजैक्शन के साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की लोकेशन कानपुर में ट्रेस की। इसके बाद देवास कोतवाली के दरोगा दीपक मालवीय अपनी टीम के साथ कानपुर पहुंचे और स्थानीय बर्रा पुलिस के सहयोग से घेराबंदी की।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान:
आयुष गुप्ता: बर्रा बाईपास के पास एक ‘मैगी प्वाइंट’ का संचालक।
वैभव शुक्ला: आयुष के साथ ही घर के पास से गिरफ्तार।
अखंड प्रताप सिंह: इसे किदवईनगर स्थित एक सैलून के बाहर से पुलिस ने हिरासत में लिया।
ठगी के पैसे का निवेश और गिरोह की जांच
बर्रा इंस्पेक्टर रवींद्र श्रीवास्तव ने बताया कि पकड़े गए आरोपी शातिर तरीके से ठगी को अंजाम देते थे। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि ठगी गई 54 लाख की भारी-भरकम राशि को कहां निवेश किया गया है। साथ ही, इस गिरोह के तार और किन-किन शहरों से जुड़े हैं, इसकी भी गहनता से जांच की जा रही है।
पुलिस की अपील: घबराएं नहीं, सतर्क रहें
पुलिस ने आम जनता को आगाह किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस विभाग वीडियो कॉल के जरिए किसी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करता है।
“अगर कोई आपको डराकर कैमरे के सामने रहने को मजबूर करे, तो घबराएं नहीं। यह साइबर ठगों का नया तरीका है। ऐसी स्थिति में तुरंत अपने नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।”








