रिपोर्ट धर्मराज निषाद
फतेहपुर (सदर)।
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए दबंगों का एक बेहद अमानवीय और क्रूर चेहरा सामने आया है। सदर तहसील क्षेत्र के अशोथर थाना इलाके में सभी कानूनी दस्तावेज, बैनामा और खतौनी होने के बावजूद कुछ रसूखदार दबंग एक असहाय, गरीब महिला को उसकी खुद की खरीदी हुई जमीन पर आशियाना नहीं बनाने दे रहे हैं। स्थानीय पुलिस से कोई मदद न मिलने से हताश और निराश होकर पीड़िता ने आखिरकार तहसील दिवस का दरवाजा खटखटाया और उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के सामने रो-रोकर न्याय की गुहार लगाई।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला अशोथर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बब्बू का डेरा (मजरे सरकंडी) का है। यहाँ की निवासी सीमा देवी के पति कामता प्रसाद लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार चल रहे हैं, जिसके कारण पूरा परिवार इस समय आर्थिक और मानसिक रूप से बेहद लाचार है। अपने सिर को छुपाने और बच्चों के भविष्य के लिए सीमा देवी ने बीते वर्ष 12 फरवरी 2024 को ग्राम सरकंडी में स्थित खाता संख्या 562, गाटा संख्या 2701 के तहत 244 वर्गमीटर भूमि का बकायदा पंजीकृत बैनामा (रजिस्ट्री) अपने नाम कराया था। इस जमीन का सरकारी रिकॉर्ड यानी खतौनी में भी सीमा देवी का नाम दर्ज हो चुका है, जिससे यह पूरी तरह स्पष्ट है कि वह इस जमीन की वैध मालकिन हैं।
लाठी-डंडों के बल पर रुकवाया निर्माण, दी जान से मारने की धमकी
पीड़िता सीमा देवी का आरोप है कि जब उन्होंने अपने इस वैधानिक भूखंड पर रहने के लिए मकान का निर्माण कार्य शुरू कराया, तो गांव के ही रसूखदार दबंग अखिलेश निषाद, मिथलेश निषाद, विमलेश निषाद और कमलेश निषाद (पुत्रगण रामकृपाल) वहां लाठी-डंडों से लैस होकर आ धमके और काम को जबरन रुकवा दिया।
जब बेबस महिला ने इस घोर अन्याय का विरोध किया, तो आरोपियों ने मर्यादा की सारी हदें पार करते हुए उसे खुलेआम धमकी दी। दबंगों ने अहंकार में चूर होकर कहा,
“तुम चाहे तहसील चली जाओ या थाना, हम यहाँ मकान किसी कीमत पर नहीं बनने देंगे।”
इसके साथ ही उन्होंने महिला और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी, जिससे पूरा परिवार खौफ के साए में जीने को मजबूर है।
स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
परेशान पीड़िता ने कानून का सहारा लेते हुए कुछ दिनों पहले थाना अशोथर में आरोपियों के खिलाफ लिखित तहरीर दी थी। लेकिन स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान तब खड़ा हो गया जब इतनी गंभीर शिकायत के बाद भी अब तक मामला दर्ज नहीं किया गया। आरोप है कि पुलिस की इस ढिलाई का फायदा उठाकर आरोपियों के हौसले और बुलंद हो गए हैं। वे अब सरेआम गांव में कहते फिर रहे हैं कि पुलिस उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती और कानून उनकी जेब में है।
बीमार पति, सिर पर बरसात और खुले आसमान के नीचे परिवार
पीड़िता सीमा देवी ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई कि उनका पति पूरी तरह बिस्तर पर है, जिसके कारण वह समाज और इस लड़ाई में बिल्कुल अकेली पड़ गई हैं। परिवार के पास रहने के लिए कोई दूसरा पक्का आशियाना नहीं है। आने वाले दिनों में बरसात का मौसम सिर पर है और ऐसी स्थिति में दबंगों की प्रताड़ना के कारण वह इस भीषण गर्मी और आने वाली बारिश में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
एसडीएम से न्याय की गुहार, कड़े कार्रवाई के निर्देश
स्थानीय स्तर पर (थाने से) कोई राहत न मिलने के बाद, हार मानकर पीड़िता शनिवार (16 मई) को सदर तहसील में आयोजित ‘तहसील दिवस’ में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के समक्ष पेश हुई। उसने एसडीएम साहब के सामने रो-रोकर अपनी व्यथा सुनाई और अशोथर थानाध्यक्ष की शिथिलता की शिकायत करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की।
पीड़िता ने एसडीएम से गुहार लगाई है कि:
उसकी जमीन का तत्काल सरकारी सीमांकन (पैमाइश) कराया जाए।
पुलिस सुरक्षा के साए में उसका मकान निर्माण कार्य दोबारा शुरू करवाया जाए ताकि उसका परिवार सुरक्षित रह सके।
प्रशासन का रुख:
उपजिलाधिकारी ने इस पूरे संवेदनशील मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने बेबस महिला को उचित न्याय का भरोसा दिलाते हुए संबंधित राजस्व और पुलिस अधिकारियों को तत्काल मौके पर जाकर निष्पक्ष जांच करने और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। अब देखना यह होगा कि तहसील दिवस के आदेश के बाद अशोथर पुलिस इस गरीब और लाचार महिला को कब तक न्याय दिला पाती ह








