फतेहपुर (बिलंदा)। जनपद के बिलंदा क्षेत्र अंतर्गत चक बरारी गांव में कोटेदार के चयन को लेकर उस समय हाई-वोल्टेज ड्रामा और तनाव देखने को मिला, जब चयन प्रक्रिया के दौरान ग्रामीणों के दो पक्ष आपस में भिड़ गए। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि पूरे गांव में हंगामे की स्थिति पैदा हो गई। माहौल बिगड़ता देख प्रशासन को तत्काल दखल देना पड़ा और पूरे गांव को अस्थायी रूप से छावनी में तब्दील कर दिया गया।
भारी पुलिस बल की मौजूदगी और प्रशासनिक सतर्कता के बीच आखिरकार आपसी सहमति से चयन प्रक्रिया पूरी कराई गई, जिसमें अतुल महाराज को गांव का नया कोटेदार चुना गया है।
मतभेद के बाद गरमाया माहौल, मौके पर पहुंचा भारी पुलिस बल
जानकारी के अनुसार, चक बरारी गांव में काफी समय से कोटेदार का चयन लंबित था। जब जिला पूर्ति विभाग के अधिकारियों की निगरानी में चयन प्रक्रिया शुरू हुई, तो ग्रामीणों के अलग-अलग गुटों में पसंदीदा उम्मीदवार को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए। बहसबाजी से शुरू हुआ यह विवाद देखते ही देखते उग्र हंगामे में बदल गया और गांव में कानून-व्यवस्था के लिए खतरा पैदा होने लगा।
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत मोर्चा संभाला। मौके पर भारी पुलिस बल को तैनात किया गया, जिसने स्थिति को नियंत्रण में लिया। पूर्ति विभाग के आला अधिकारी भी मौके पर मुस्तैद रहे ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
प्रशासनिक सतर्कता: अधिकारियों ने दोनों पक्षों को शांत कराकर बातचीत की मेज पर लाया। पुलिस के कड़े पहरे के बीच ही आगे की बातचीत और चयन की कार्यवाही को आगे बढ़ाया गया।
आपसी सहमति से हुआ फैसला, समर्थकों में जश्न
पुलिस की कड़ी निगरानी और अधिकारियों की सूझबूझ के बाद ग्रामीणों के बीच बातचीत का दौर चला। अंततः, सामूहिक सहमति के आधार पर अतुल महाराज के नाम पर मुहर लगाई गई। उन्हें नया कोटेदार घोषित करते ही उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया और उनके प्रति अपना समर्थन जताया।
अब स्थिति पूरी तरह सामान्य
समय रहते प्रशासनिक और पुलिस हस्तक्षेप के कारण एक बड़ा विवाद टल गया। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती हंगामे के बाद पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संपन्न करा ली गई है।
फिलहाल गांव में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में और सामान्य है। यह घटना साफ तौर पर दर्शाती है कि यदि प्रशासन समय पर मुस्तैद न होता, तो विवाद बड़ा रूप ले सकता था, लेकिन सूझबूझ से मामला आपसी सहमति पर खत्म हुआ।








