जवान विकास सिंह के आंसू देख पुलिस प्रशासन से भिड़े जांबाज कमांडेंट गौरव प्रसाद, सोशल मीडिया पर मिल रहा भारी जनसमर्थन
🔴 विशेष ग्राउंड रिपोर्ट
✍️ इनपुट: कानपुर ब्यूरो चीफ (राहुल द्विवेदी)
📍 कानपुर (उत्तर प्रदेश)
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर महानगर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे प्रशासनिक और पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है। अपने जवान के स्वाभिमान और उसकी पीड़ित माँ को न्याय दिलाने के लिए ITBP (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) के कमांडेंट गौरव प्रसाद विभागीय कार्रवाई की परवाह किए बिना सीधे कानपुर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए। उनके साथ आईटीबीपी के करीब 50 चुनिंदा कमांडो भी मौजूद थे। कमांडेंट के इस साहसिक कदम की आज हर तरफ सराहना हो रही है।
🚨 क्या था पूरा मामला? क्यों मजबूर हुए कमांडेंट?
जानकारी के अनुसार, ITBP में तैनात जवान विकास सिंह की माँ के साथ कोई अन्याय हुआ था, जिसके लिए जवान लगातार न्याय की गुहार लगा रहा था:
संवेदनहीन बना रहा सिस्टम: पीड़ित जवान अपनी माँ को इंसाफ दिलाने के लिए प्रशासनिक चौखटों पर भटकता रहा, लेकिन कानपुर पुलिस द्वारा मामले में एफआईआर (FIR) तक दर्ज नहीं की जा रही थी।
जवान का सब्र का बांध टूटा: व्यवस्था के इस ढुलमुल और संवेदनहीन रवैये के आगे जब देश की सुरक्षा में तैनात जवान विकास सिंह टूट गया और बेबस होकर रो पड़ा, तब यह बात कमांडेंट गौरव प्रसाद तक पहुंची।
👊 नौकरी और कुर्सी की परवाह किए बिना लिया बड़ा फैसला
जवान की इस बेबसी ने कमांडेंट गौरव प्रसाद को झकझोर कर रख दिया। उन्हें अच्छी तरह मालूम था कि सेना या अर्धसैनिक बल के अधिकारियों का इस तरह सिविल पुलिस के दफ्तर पहुंचना नियमों के दायरे में विभागीय कार्रवाई को न्योता दे सकता है, लेकिन उन्होंने अपने जवान के आंसू के आगे अपनी कुर्सी की चिंता नहीं की।
कमिश्नर ऑफिस में दी दस्तक: कमांडेंट गौरव प्रसाद अपने 50 जांबाज कमांडोज़ के साथ सीधे कानपुर कमिश्नर ऑफिस पहुंच गए और पुलिस प्रशासन के सामने जवान की बात मजबूती से रखी।
सोते हुए सिस्टम को जगाया: यह सिर्फ एक प्रशासनिक विरोध नहीं था, बल्कि उस सोते हुए और संवेदनहीन हो चुके सिस्टम को जगाने की पुरजोर कोशिश थी, जो देश की सीमा की रक्षा करने वाले एक जवान की पीड़ा को देखकर भी मौन साधे बैठा था।
💬 नियम-कायदों के बीच मिल रहा “सैल्यूट”
इस घटना के बाद से प्रशासनिक गलियारों में नियम-कायदों और अनुशासन को लेकर बहस छिड़ गई है। लेकिन आम जनता और सोशल मीडिया पर कमांडेंट गौरव प्रसाद को एक ‘नायक’ की तरह देखा जा रहा है।
“अगर कमांडेंट खड़े न होते, तो दब जाता मामला”
क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों और ग्रामीणों का साफ कहना है कि अगर आज यह जांबाज कमांडेंट अपने जवान की ढाल बनकर खड़ा नहीं होता, तो शायद देश की रक्षा करने वाले इस जवान की आवाज को भी हमेशा के लिए दबा दिया जाता। सोशल मीडिया पर लोग इस देशभक्त और संवेदनशील अधिकारी को देश का असली हीरो बताते हुए सैल्यूट कर रहे हैं। 🇮🇳
इण्डिया वार्ता न्यूज़ (IVN) इस जांबाज कमांडेंट के हौसले को सलाम करता है और उम्मीद करता है कि कानपुर पुलिस इस मामले की गंभीरता को समझते हुए जवान की माँ को त्वरित न्याय देगी।








