कानपुर। उत्तर प्रदेश की कानपुर पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। कमिश्नरेट कानपुर नगर की साइबर क्राइम सेल (पश्चिम जोन) और थाना पनकी पुलिस की संयुक्त टीम ने फर्जी फर्मों के नाम पर सिम कार्ड एक्टिवेट कर साइबर ठगों को सप्लाई करने वाले गिरोह के 5 शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस की इस मुस्तैद कार्रवाई से देशभर में फैले साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क पर लगाम कसने में कामयाबी मिली है।
फर्जी दस्तावेजों से खेल, 36 लाख की ठगी का खुलासा
पुलिस जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी फर्जी दस्तावेजों और फर्जी फर्में बनाकर उनकी आड़ में थोक के भाव सिम कार्ड हासिल करते थे। इन सिमों को एक्टिवेट करने के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे साइबर अपराधियों को मोटी रकम में बेच दिया जाता था। ठग इन सिम कार्डों का इस्तेमाल नामचीन कंपनियों के नाम का दुरुपयोग कर और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोगों को चूना लगाने के लिए करते थे।
जब पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज देश के विभिन्न राज्यों की शिकायतों का गहन विश्लेषण किया, तो इस गिरोह के जरिए करीब 36 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सीधे तौर पर सामने आया। गिरोह का जाल कई राज्यों में फैला होने के कारण ठगी का यह आंकड़ा और भी बड़ा होने की आशंका है।
भारी मात्रा में अवैध सिम और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद
संयुक्त टीम ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से साइबर अपराध का एक पूरा जखीरा बरामद किया है। बरामद किए गए उपकरणों की सूची इस प्रकार है:
सिम कार्ड: 12,383 (एक्टिवेटेड और फर्जी)
मोबाइल फोन: 50
लैपटॉप: 08
एटीएम कार्ड: 40
अन्य: साइबर अपराध में प्रयुक्त होने वाले कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
पुलिस कमिश्नर का बयान और आगे की कार्रवाई
मामले की जानकारी देते हुए पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी पांचों अभियुक्तों के खिलाफ संबंधित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और उन्हें जेल भेजने की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
“बरामद किए गए भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, मोबाइल डेटा और बैंकिंग नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। इस गिरोह से जुड़े अन्य संपर्कों और बैकएंड पर काम करने वाले अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए भी टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। जल्द ही कुछ और बड़े खुलासे हो सकते हैं।”
— रघुबीर लाल, पुलिस आयुक्त
पुलिस अब इस बात की भी तहकीकात कर रही है कि इतनी बड़ी संख्या में सिम कार्ड जारी करने में किस टेलीकॉम कंपनी के रिटेलर या डिस्ट्रीब्यूटर की मिलीभगत थी, ताकि उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी शिकंजा कसा जा सके।








