फतेहपुर। जिले की मिट्टी ने एक बार फिर देश को एक जांबाज सैन्य अधिकारी दिया है। फतेहपुर के एक साधारण परिवार के लाल हिमांशू ने अपनी मेहनत और फौलादी इरादों से भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर जनपद का मान बढ़ाया है। संसाधनों के अभाव को अपनी कमजोरी बनाने के बजाय हिमांशू ने उसे अपनी ताकत बनाया और आज सफलता का शिखर छू लिया।
मैकेनिक पिता और आंगनबाड़ी माँ का बढ़ाया मान
हिमांशू की यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उनका परिवेश बेहद साधारण रहा है। उनके पिता एक मोटर मैकेनिक के रूप में कड़ी धूप में मेहनत कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, वहीं माँ आंगनबाड़ी कार्यकत्री के तौर पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं। हिमांशू ने साबित कर दिया कि सफलता किसी विरासत की मोहताज नहीं होती, बस लक्ष्य के प्रति अडिग विश्वास होना चाहिए।
NDA जैसी कठिन परीक्षा में गाड़ा झंडा
देश की सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में से एक NDA (राष्ट्रीय रक्षा अकादमी) को पास करना हिमांशू का सपना था। दिन-रात के कठिन परिश्रम और अटूट समर्पण के बल पर उन्होंने न केवल इस परीक्षा को उत्तीर्ण किया, बल्कि प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया।
सफलता का मंत्र: माता-पिता और गुरुओं का मार्गदर्शन
अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हिमांशू ने कहा:
“मेरी इस सफलता के पीछे मेरे माता-पिता का त्याग और स्कूल के शिक्षकों का सही मार्गदर्शन है। उनके सहयोग के बिना इस मुकाम तक पहुँचना संभव नहीं था।”
क्षेत्र में खुशी का माहौल, युवाओं के लिए बने मिसाल
हिमांशू के सैन्य अधिकारी बनने की खबर मिलते ही उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। परिजनों की आँखों में गर्व के आँसू हैं और पूरे गाँव में जश्न का माहौल है। हिमांशू की यह गौरवगाथा उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखते हैं।








