विजयीपुर, फतेहपुर।
फतेहपुर जनपद के विजयीपुर ब्लॉक अंतर्गत सिलमी गांव में उस वक्त मातम छा गया, जब एक 33 वर्षीय महिला की प्रसव के कुछ ही देर बाद संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने स्वास्थ्य कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले से बीमारी की सूचना देने के बावजूद उचित सावधानी नहीं बरती गई।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिलमी गांव निवासी शिवबाबू गौतम की पत्नी संगीता (33 वर्ष) को प्रसव पीड़ा होने पर बुधवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) विजयीपुर में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में संगीता ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया, जिससे परिवार में पहले खुशी का माहौल था। लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिकी। प्रसव के कुछ ही समय बाद संगीता की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।
रेफर करने के दौरान तोड़ा दम
पीएचसी के कर्मचारियों ने महिला की हालत गंभीर देखते हुए उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) हरदो के लिए रेफर कर दिया। परिजन आनन-फानन में उसे लेकर हरदो पहुंचे, लेकिन वहां डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद संगीता को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल से मौत की खबर मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई।
परिजनों का गंभीर आरोप
मृतका के पति शिवबाबू, जो मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि:
“मेरी पत्नी पहले से बीमार थी, जिसकी जानकारी हमने प्रसव से पहले ही ड्यूटी पर मौजूद महिला डॉक्टर को दे दी थी। अगर स्थिति नाजुक थी, तो उसे पहले ही बड़े अस्पताल रेफर करना चाहिए था या प्रसव के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए थी।”
अधिकारियों का पक्ष
इस संबंध में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. बृजेश पांडे ने बताया कि महिला को प्रसव के लिए भर्ती किया गया था। प्रसव के बाद अचानक उसकी स्थिति बिगड़ी, जिसे देखते हुए बेहतर इलाज के लिए उसे तत्काल रेफर किया गया था।
फिलहाल, मां की मौत के बाद नवजात बच्चा अपनी मां की ममता से वंचित हो गया है। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसव के दौरान दी जाने वाली आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की तत्परता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।








