फतेहपुर: जिले में अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खिलाफ प्रशासनिक अमला कागजों पर तो बेहद सख्त नजर आ रहा है, लेकिन धरातल की तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। गुरुवार को कलेक्ट्रेट के महात्मा गांधी सभागार में जिलाधिकारी रविन्द्र सिंह और पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने जनपद स्तरीय टास्क फोर्स के साथ बैठक कर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने का फरमान सुनाया है।
कलेक्ट्रेट में बनी रणनीति: “लापरवाही हुई तो नपेंगे अधिकारी”
बैठक के दौरान डीएम रविन्द्र सिंह ने खान अधिकारी और तहसील स्तरीय फोर्स को दो-टूक चेतावनी दी कि अवैध खनन और अवैध परिवहन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि:
शहर के भीतर से खनिज का परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित रहे।
खनन क्षेत्रों में तत्काल खनिज चौकियां स्थापित की जाएं।
सड़क किनारे अवैध रूप से खड़े वाहनों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो।
धरातल की हकीकत: एम्बुलेंस फंसी, सड़कें ध्वस्त!
प्रशासनिक बैठक के इन भारी-भरकम निर्देशों के बीच असोथर-थरियांव मार्ग की तस्वीरें प्रशासन के दावों को मुंह चिढ़ा रही हैं। एक तरफ जिलाधिकारी ‘संवेदनशीलता’ की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ मर्का खंड-3 से आने वाले ओवरलोड डंपरों ने इस मुख्य मार्ग को खंडहर में तब्दील कर दिया है। हालात इतने बदतर हैं कि जीवनदायिनी एम्बुलेंस भी इन डंपरों के जाम और टूटी सड़कों के बीच दम तोड़ती नजर आ रही है।
सवाल: निर्देशों का असर कब दिखेगा?
डीएम-एसपी की इस साझा बैठक के बाद अब जनता की निगाहें धरातल पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या कलेक्ट्रेट के एसी कमरों में लिए गए फैसले असोथर की उन सड़कों तक पहुंच पाएंगे जहाँ रात भर ‘मौत के सौदागर’ दहाड़ते हैं? क्या जिम्मेदार अधिकारी वास्तव में उन खनन माफियाओं पर लगाम लगाएंगे जो जलधाराओं को चीरकर मौरंग निकाल रहे हैं?
निष्कर्ष:
अगर बैठक के निर्देश केवल फाइलों तक सीमित रहे और धरातल पर ओवरलोडिंग बंद न हुई, तो जनता का प्रशासन पर से विश्वास उठना लाजमी है। अब देखना यह है कि टास्क फोर्स इन ‘मौरंग माफियाओं’ के खिलाफ कब और कैसी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करती है।








