फतेहपुर: जिले के राजकीय मेडिकल कॉलेज से आ रही तस्वीरें बेहद चिंताजनक हैं। बड़ी उम्मीदों के साथ शुरू हुआ यह संस्थान आज खुद ‘बीमार’ नजर आ रहा है। चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण जनता बेहाल है।
अधूरी तैयारियों की मार झेल रहे मरीज
दावा तो विश्वस्तरीय सुविधाओं का किया गया था, लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके ठीक उलट है। अधूरी तैयारियों के बीच संचालित इस मेडिकल कॉलेज में मरीजों और उनके तीमारदारों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। न तो समय पर डॉक्टर उपलब्ध हैं और न ही जरूरी जांच की सुविधाएं सुचारू रूप से चल रही हैं।
अस्पताल में अव्यवस्थाओं का बोलबाला
मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि:
इलाज के लिए भटकते तीमारदार: स्ट्रेचर से लेकर बेड तक के लिए तीमारदारों को मिन्नतें करनी पड़ रही हैं।
ठप पड़ी स्वास्थ्य सेवाएं: बुनियादी सुविधाओं के अभाव में गंभीर मरीजों को रेफर करने का खेल बदस्तूर जारी है।
प्रशासनिक उदासीनता: अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के चलते परिसर में गंदगी और अव्यवस्था का अंबार लगा है, जिससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है।
जनता में भारी आक्रोश
इलाज कराने आए तीमारदारों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज महज सफेद हाथी साबित हो रहा है। दूर-दराज से आए गरीब मरीज इलाज के अभाव में वापस लौटने या निजी अस्पतालों में लुटने को मजबूर हैं। स्थानीय जनता ने जिला प्रशासन और शासन से मांग की है कि मेडिकल कॉलेज की बदहाली को दूर कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
ग्राउंड रिपोर्ट: मेडिकल कॉलेज की इस दुर्दशा ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल कर रख दी है। क्या प्रशासन इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेगा या जनता यूं ही राम भरोसे रहेगी?








