ब्यूरो रिपोर्ट राहुल द्विवेदी
कानपुर। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में कानून-व्यवस्था को और अधिक चुस्त-दुरुस्त करने के लिए पुलिस कमिश्नर एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करने जा रहे हैं। प्रस्तावित क्राइम मीटिंग को लेकर पुलिस विभाग के गलियारों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इस बैठक के कुछ ही घंटों बाद जिले के कई थाना प्रभारियों और सहायक पुलिस आयुक्तों (ACP) के कार्यक्षेत्र में भारी उलटफेर देखने को मिल सकता है।
परफॉर्मेंस और शिकायतों के आधार पर गाज गिरना तय
सूत्रों के मुताबिक, यह फेरबदल केवल रूटीन प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे अधिकारियों की ‘परफॉर्मेंस रिपोर्ट’ और उनके क्षेत्रों में अपराध की स्थिति मुख्य आधार है। पुलिस कमिश्नर के पास कई थाना प्रभारियों के खिलाफ गुप्त शिकायतें पहुंची हैं, जिनमें अपराध नियंत्रण में शिथिलता और मादक पदार्थों (ड्रग्स) की बिक्री पर अंकुश न लगा पाना शामिल है।
जिन थानों में अपराध का ग्राफ बढ़ा है और कानून-व्यवस्था की स्थिति संतोषजनक नहीं रही, वहां के प्रभारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
ACP स्तर पर भी होगा बड़ा बदलाव
सिर्फ थाना प्रभारी ही नहीं, बल्कि कई ACP (सहायक पुलिस आयुक्त) के कार्यक्षेत्र में भी बदलाव की तैयारी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य शहर की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करना और अधिकारियों को उनके ट्रैक रिकॉर्ड के अनुसार नई जिम्मेदारियां सौंपना है। बेहतर कार्य करने वाले अधिकारियों को संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्रों की कमान दी जा सकती है।
क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टरों को मिल सकती है थानों की कमान
चर्चा यह भी है कि क्राइम ब्रांच में तैनात कुछ अनुभवी इंस्पेक्टरों को फील्ड में उतारा जा सकता है। पुलिस महकमे में चल रही सुगबुगाहट के अनुसार, क्राइम ब्रांच के तेज-तर्रार अधिकारियों को थानों की कमान सौंपकर अपराध पर प्रभावी लगाम लगाने की रणनीति तैयार की गई है।







