रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ राहुल द्विवेदी
कानपुर (उत्तर प्रदेश): अक्सर कहा जाता है कि महानगरों की भागदौड़ में लोग दूसरों का दुख भूल जाते हैं, लेकिन कानपुर के रामादेवी चौराहे पर सोमवार को जो हुआ, उसने एक बार फिर साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है। एक सड़क हादसे में घायल हुए बुजुर्ग दुग्ध विक्रेता की मदद के लिए जिस तरह से आम जनता आगे आई, उसकी हर तरफ सराहना हो रही है।
टक्कर के बाद सड़क पर फैला दूध, बुजुर्ग हुए लहूलुहान
जानकारी के अनुसार, रामादेवी चौराहे पर एक डिजायर कार और दूध ले जा रहे बुजुर्ग की बाइक के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बुजुर्ग बाइक समेत सड़क पर दूर जा गिरे और उनकी बाइक पर लदा सारा दूध सड़क पर बह गया। इस हादसे में बुजुर्ग के पैर में गंभीर चोट आई और गहरा घाव होने के कारण काफी खून बहने लगा।
राहगीरों ने दिखाई तत्परता
हादसा होते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई, लेकिन वहाँ मौजूद राहगीरों ने बिना समय गंवाए घायल बुजुर्ग को संभाला। लोगों ने तुरंत उन्हें सहारा देकर सड़क के बीच से सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया और प्राथमिक उपचार में मदद की। स्थानीय लोगों की इस तत्परता ने न केवल बुजुर्ग की जान जोखिम में पड़ने से बचाई, बल्कि समाज के सामने एक सकारात्मक संदेश भी दिया।
कार चालक ने दिखाई जिम्मेदारी, हुआ समझौता
आमतौर पर सड़क हादसों के बाद विवाद और हंगामे की स्थिति बनती है, लेकिन यहाँ नजारा अलग था। कार चालक ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए घायल बुजुर्ग का इलाज कराने और उनके हुए नुकसान (दूध व बाइक) की भरपाई करने की बात कही। इसके बाद दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से मामले को सुलझा लिया।
ट्रैफिक व्यवस्था पर उठे सवाल
हादसे के कारण रामादेवी जैसे व्यस्त चौराहे पर कुछ समय के लिए यातायात बाधित रहा। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यहाँ ट्रैफिक दबाव बहुत अधिक रहता है और थोड़ी सी भी लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन जाती है। लोगों ने मांग की है कि ऐसे संवेदनशील चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस की मुस्तैदी और अधिक बढ़ाई जानी चाहिए।







