असोथर (फतेहपुर): जनपद के असोथर थाना क्षेत्र से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ सोमवार दोपहर स्कूल बस की चपेट में आने से यूकेजी (UKG) में पढ़ने वाले 5 वर्षीय मासूम छात्र की मौत हो गई। इस घटना ने न केवल एक परिवार का चिराग बुझा दिया, बल्कि स्कूली वाहनों में सुरक्षा और प्रबंधन की भारी लापरवाही को भी उजागर किया है।
बोतल उठाने झुका था मासूम, चालक ने चढ़ा दिया टायर
चंद्रगढ़ लखनहा (मजरे ऐझी) निवासी मुकेश चौहान का पुत्र कार्तिकेय, लवकुश इंटर कॉलेज असोथर का छात्र था। सोमवार दोपहर करीब 3 बजे जब वह अपने बड़े भाई किशन के साथ स्कूल बस से गांव पहुँचा, तो उतरते समय उसके बैग से पानी की बोतल गिरकर बस के अगले टायर के पास जा रुकी। जैसे ही मासूम बोतल उठाने के लिए झुका, चालक ने लापरवाही बरतते हुए बस आगे बढ़ा दी। बच्चा टायर की चपेट में आ गया और उसके सिर पर गंभीर चोटें आईं।
भाई के शोर मचाने पर दौड़े ग्रामीण, रास्ते में तोड़ा दम
कार्तिकेय के बड़े भाई किशन के शोर मचाने पर ग्रामीण मौके पर जुटे, लेकिन तब तक चालक बस छोड़कर फरार हो चुका था। परिजन घायल मासूम को लेकर जिला अस्पताल भागे, लेकिन रास्ते में बेसड़ी गांव के पास उसने दम तोड़ दिया। मासूम की माँ अंजनी का रो-रोकर बुरा हाल है, वह बार-बार बस यही कह रही हैं— “₹100 की बोतल ने मेरे लाल की जान ले ली।”
ग्रामीणों का आक्रोश: “बिना कंडक्टर के चल रही थी मौत की बस”
हादसे के बाद गुस्साए ग्रामीणों और परिजनों ने सड़क जाम कर जमकर हंगामा किया। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि बस में परिचालक (कंडक्टर) नहीं था। यदि परिचालक होता, तो बच्चा सुरक्षित उतरता और यह हादसा टल सकता था। पुलिस की कड़ी मशक्कत और समझाइश के बाद करीब एक घंटे में जाम खुला।
स्कूल प्रबंधन और पुलिस का पक्ष
स्कूल प्रबंधक: लवकुश सिंह ने स्वीकार किया कि उस दिन परिचालक अवकाश पर था, लेकिन चालक को बिना परिचालक बस न ले जाने के निर्देश थे।
पुलिस: थाना प्रभारी धीरेन्द्र ठाकुर ने बताया कि बस को कब्जे में ले लिया गया है और फरार चालक की तलाश जारी है।
एआरटीओ: प्रतीक मिश्रा के अनुसार बस के कागजात सही पाए गए हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों की जांच जारी है।
इंडिया वार्ता न्यूज़ का सवाल?
क्या कागजों का सही होना ही सुरक्षा की गारंटी है? मासूम बच्चों की जान से खिलवाड़ कर बिना परिचालक के बसें सड़क पर क्यों दौड़ रही हैं? इस मौत का असली जिम्मेदार कौन— लापरवाह चालक या नियम ताक पर रखने वाला स्कूल प्रबंधन?








