कानपुर देहात: प्यार जब जुनून और सनक का रूप ले ले, तो उसका अंजाम कितना भयावह हो सकता है, इसकी एक रोंगटे खड़े कर देने वाली मिसाल कानपुर देहात के अकारू गांव में देखने को मिली। एकतरफा प्यार में अंधे हुए 26 वर्षीय युवक शिशुपाल ने 15 वर्षीय किशोरी की गला रेतकर निर्मम हत्या कर दी और वारदात को अंजाम देने के बाद खुद भी फांसी के फंदे पर झूल गया।
मामले का संक्षिप्त विवरण
घटना मंगलवार सुबह की है। औरैया निवासी शिशुपाल करीब डेढ़ साल से अपने बीमार मामा की सेवा के लिए अकारू गांव में रह रहा था। इसी दौरान उसका परिचय पड़ोस की एक किशोरी से हुआ। धीरे-धीरे यह जान-पहचान एकतरफा प्रेम और सनक में बदल गई। जब किशोरी के परिजनों को इसकी भनक लगी, तो उन्होंने विरोध किया। इसी विरोध और किशोरी की बेरुखी से नाराज शिशुपाल ने इस खूनी वारदात को अंजाम दिया।
हत्या से पहले दी थी धमकी
परिजनों के अनुसार, शिशुपाल लगातार किशोरी और उसकी मां को धमकियां दे रहा था। वह अक्सर कहता था, “अगर मेरी नहीं हुई, तो किसी की नहीं होने दूंगा… डोली नहीं उठने दूंगा।”
सोमवार का हंगामा: हत्या से एक दिन पहले सोमवार को शिशुपाल ने किशोरी के घर घुसकर उसका मोबाइल तोड़ दिया था।
मंगलवार की वारदात: सुबह जब किशोरी घर में अकेली थी, तब शिशुपाल वहां पहुंचा। विवाद के दौरान उसने सब्जी काटने वाले चाकू से किशोरी का गला रेत दिया।
वारदात के बाद खुदकुशी
हत्या करने के बाद आरोपी शिशुपाल अपने मामा के घर गया और वहां टिनशेड में फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। जब किशोरी की मां घर लौटी, तो बिस्तर पर चादर से ढका बेटी का लहूलुहान शव देख उनकी चीख निकल गई।
पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट
पुलिस को घटनास्थल से खून से सना चाकू और मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, किशोरी की श्वासनली (ट्रैकिया) कटने के कारण मौके पर ही मौत हो गई थी।
डिजिटल साक्ष्य: पुलिस अब दोनों के मोबाइल फोन और कॉल डिटेल्स खंगाल रही है।
एक ही वाहन में शव: गांव में गमगीन माहौल तब और भावुक हो गया जब हत्यारे और मृतका, दोनों के शव एक ही वाहन में पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए।
विशेषज्ञों की राय
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि ‘रिजेक्शन’ (अस्वीकृति) न झेल पाने की मानसिक स्थिति युवाओं को हिंसक बना रही है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि यदि कोई व्यक्ति लगातार पीछा करे या धमकी दे, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय पुलिस या सामाजिक स्तर पर तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।
निष्कर्ष: इस दोहरी मौत ने दो परिवारों को उम्र भर का गम दे दिया है। अकारू गांव की यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि बढ़ता डिजिटल संपर्क और अनियंत्रित जुनून किस कदर जानलेवा साबित हो सकता है।








