असोथर (फतेहपुर):
“भवतु सब्ब मंगलं” (सभी का मंगल हो) के पावन उद्घोष के साथ ऐझी विकासखंड असोथर की धरती उस समय धम्म के रंग में रंग गई, जब बौद्ध सेवा समिति फतेहपुर द्वारा एक विशाल सेवा समागम का आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल एक भंडारा नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और करुणा का एक ऐसा मंच बन गया जहाँ ऊंच-नीच के भेद को भुलाकर हजारों लोग एक साथ सेवा भाव में लीन नजर आए।
करुणा का संदेश: वस्त्र, अन्न और चीवर दान
तथागत बुद्ध के ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ के सिद्धांत को धरातल पर उतारते हुए समिति द्वारा त्रिविध दान कार्यक्रम चलाया गया। कड़ाके की धूप/मौसम की परवाह किए बिना जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र वितरित किए गए। वहीं, धम्म की रीढ़ माने जाने वाले भिक्षु संघ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्हें अत्यंत श्रद्धा के साथ चीवर दान किया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में पधारे पूज्य भंते सागर और उनके साथ आए अन्य भन्ते गणों ने इस सेवा कार्य को अनुकरणीय बताया। भंते जी ने अपने धम्म देशना में कहा कि सच्चा बौद्ध वही है जो अपने सामर्थ्य अनुसार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आंसू पोंछने का काम करे।
सरहदों को लांघकर पहुंचे श्रद्धालु, मातृशक्ति ने संभाली कमान
इस कार्यक्रम की गूंज केवल फतेहपुर जिले तक सीमित नहीं रही। कौशाम्बी, बांदा, रायबरेली और कानपुर जैसे पड़ोसी जिलों से भी बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायी ऐझी गांव पहुंचे, जिससे यह आयोजन एक अंतर-जनपदीय महासंगम में तब्दील हो गया।
कार्यक्रम में महिलाओं की उपस्थिति ने विशेष ध्यान खींचा। सावित्री बौद्ध और श्रीमती बौद्ध के नेतृत्व में महिलाओं की टोली ने न केवल वैचारिक चर्चाओं में हिस्सा लिया, बल्कि भंडारे और दान वितरण की व्यवस्था को भी पूरी शालीनता से संचालित किया।
संकल्प से सिद्धि: समिति के कर्णधारों का प्रयास
इस भव्य आयोजन की सफलता के पीछे बौद्ध सेवा समिति के पदाधिकारियों की महीनों की मेहनत छिपी थी। कार्यक्रम के दौरान:
संस्थापक रामराज बौद्ध ने समाज को संगठित होने और बाबासाहेब के शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो के नारे को जीवन में उतारने की अपील की।
सचिव राजेंद्र प्रसाद हंस ने आगंतुकों का स्वागत करते हुए समिति की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट साझा की।
मीडिया प्रभारी मोहित चक्रवर्ती के कुशल प्रबंधन के कारण कार्यक्रम की गूंज डिजिटल और प्रिंट मीडिया के माध्यम से दूर-दूर तक पहुंची।
एक पंगत में हजारों ने ग्रहण किया प्रसाद
शाम तक चले इस भव्य भंडारे में जाति और वर्ग की दीवारें ढहती नजर आईं। ऐझी ग्राम के वासियों के साथ-साथ दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने एक ही पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। ग्रामीणों का कहना था कि असोथर के इतिहास में ऐसा अनुशासित और गरिमामयी सामाजिक कार्यक्रम लंबे समय बाद देखने को मिला है। समिति ने अंत में सभी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।








