कानपुर में हड़कंप: मां का कटा हुआ हाथ आइस बॉक्स में लेकर पुलिस कमिश्नर ऑफिस पहुंचा ITBP जवान; अस्पताल पर लापरवाही का आरोप
रिपोर्ट: राहुल द्विवेदी, ब्यूरो चीफ, कानपुर (इंडिया वार्ता न्यूज़)
निजी अस्पताल की लापरवाही से फैला गैंगरीन, काटनी पड़ी मां की बांह; थानों के चक्कर काटने के बाद इंसाफ के लिए कमिश्नरेट दफ्तर पहुंचा देश का जवान।
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक ऐसा दिल दहला देने वाला और बेहद भावुक मामला सामने आया है, जिसने पूरी कानून व्यवस्था और स्वास्थ्य महकमे को हिलाकर रख दिया है। एक बेटा, जो देश की सीमाओं की रक्षा करने वाला भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) का जवान है, वह अपनी मां का कटा हुआ हाथ एक आइस बॉक्स में लेकर सीधे पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गया। जवान को इस हाल में देख कमिश्नरेट कार्यालय में मौजूद पुलिसकर्मी, फरियादी और आम जनता स्तब्ध रह गई। आंखों में आंसू और आवाज में बेतहाशा दर्द लिए जवान रोते हुए बस एक ही बात कह रहा था— “जिस हाथ से मां ने बचपन में मुझे कोर (निवाला) खिलाया, आज उसी हाथ को इंसाफ दिलाने के लिए बक्से में लेकर भटक रहा हूँ।”
फतेहपुर का रहने वाला है पीड़ित जवान, इलाज के दौरान बिगड़ी बात
मूल रूप से फतेहपुर जिले की खागा तहसील अंतर्गत हथगांव के रहने वाले विकास सिंह वर्तमान में कानपुर के महाराजपुर स्थित ITBP की 32वीं वाहिनी में तैनात हैं। विकास ने बताया कि 13 मई को उनकी 56 वर्षीय मां निर्मला देवी को अचानक सांस लेने में गंभीर तकलीफ हुई। उन्हें पहले ITBP अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से डॉक्टरों ने उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया। विकास अपनी मां को सिंहपुर स्थित पारस हॉस्पिटल ले जा रहे थे, लेकिन टाटमिल चौराहे पर लगे भीषण जाम के कारण आपातकालीन स्थिति में उन्होंने मां को टाटमिल स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में ही भर्ती करा दिया।
ड्रिप लगाने में लापरवाही बनी नासूर; हाथ में फैल गया गैंगरीन
जवान विकास सिंह का आरोप है कि कृष्णा हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती के दौरान डॉक्टरों ने उनकी मां के दाहिने हाथ में ड्रिप (विगो) लगाई थी। अगले दिन जब वह मां से मिले, तो उनका पूरा दाहिना हाथ बुरी तरह सूज चुका था। शिकायत करने पर स्टाफ ने विगो तो हटा दिया और कहा कि सूजन ठीक हो जाएगी, लेकिन कुछ ही घंटों में हाथ काला पड़ने लगा।
मां की बिगड़ती हालत देख विकास उन्हें तत्काल कोठारी चौराहे के पास स्थित पारस हॉस्पिटल ले गए। वहाँ डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि गलत तरीके से ड्रिप या इंजेक्शन लगने के कारण हाथ में भयंकर संक्रमण फैल चुका है और वह ‘गैंगरीन’ (अंग का सड़ना) में बदल गया है। अंततः मां की जान बचाने के लिए डॉक्टरों को 17 मई को उनका दाहिना हाथ काटना पड़ा।
जब थानों ने फेरा मुंह, तो उठाना पड़ा यह खौफनाक कदम
जवान का आरोप है कि इस घोर लापरवाही के खिलाफ वह सबसे पहले रेलबाजार थाने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उनकी एक न सुनी। इसके बाद उन्होंने एडीसीपी पूर्वी और एसीपी कार्यालय के चक्कर भी काटे, पर हर जगह से सिर्फ कोरा आश्वासन मिला। सिस्टम से थके और टूटे जवान ने अंततः अपने ITBP के उच्चाधिकारियों को पूरी बात बताई। उनकी अनुमति मिलने के बाद, मंगलवार को वह मां का कटा हुआ हाथ आइस बॉक्स में रखकर सीधे पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए।
जैसे ही उन्होंने कार्यालय के बाहर बक्सा खोलकर कटा हाथ दिखाया, वहाँ सनसनी फैल गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने तत्काल मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को जांच के कड़े निर्देश दिए।
3 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट; अस्पतालों के दावों में विरोधाभास
मामला तूल पकड़ते ही स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई है। सीएमओ के निर्देश पर एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी की अध्यक्षता में विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक हाई-लेवल जांच कमेटी गठित कर दी गई है। टीम ने कृष्णा और पारस दोनों अस्पतालों से इलाज से जुड़े दस्तावेज और केस शीट जब्त कर ली है और तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
कृष्णा हॉस्पिटल का पक्ष: अस्पताल के प्रबंधक योगेंद्र यादव ने सभी आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि मरीज का डॉप्लर टेस्ट सामान्य था और परिजन अपनी मर्जी से डिस्चार्ज कराकर ले गए थे।
पारस हॉस्पिटल का पक्ष: डॉक्टरों का कहना है कि जब मरीज उनके पास आई, तो हाथ में ब्लड फ्लो पूरी तरह बंद हो चुका था और गैंगरीन तेजी से फैल रहा था, इसलिए जान बचाने के लिए हाथ काटना ही एकमात्र रास्ता था।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस खौफनाक और मर्मस्पर्शी घटना ने कानपुर की निजी स्वास्थ्य व्यवस्था और थानों की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी देश के जवान की इस बेबसी को देखकर लोगों में भारी आक्रोश है और दोषी डॉक्टरों व स्टाफ के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज करने की मांग उठ रही है। अब देखना यह है कि तीन दिन बाद आने वाली स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट में क्या सच सामने आता है।








