रिपोर्ट: राहुल द्विवेदी, ब्यूरो चीफ (कानपुर)
कानपुर। कानपुर कमिश्नरेट की पनकी थाना पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक फैक्ट्री से लाखों रुपये मूल्य की एलईडी लाइटें चोरी होने की वारदात का महज कुछ ही समय में सफल खुलासा कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में दो शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है, जिनके कब्जे से चोरी की गईं 108 एलईडी लाइटें बरामद हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन लाइटों की अनुमानित कीमत करीब 10 लाख रुपये बताई जा रही है।
सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों से खुला राज
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, पनकी के साइट नंबर-03 इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक फैक्ट्री से करीब 110 हाई-वैल्यू एलईडी लाइटें चोरी हो गई थीं। इस संबंध में पीड़ित पक्ष द्वारा पनकी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। औद्योगिक क्षेत्र में हुई इस बड़ी चोरी को गंभीरता से लेते हुए पनकी थाना पुलिस ने तत्काल टीम गठित की। पुलिस ने फैक्ट्री और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और तकनीकी साक्ष्यों (सर्विलांस) की मदद से चोरों को ट्रैक करना शुरू किया।
फैक्ट्री के ऑपरेटर ने ही रची थी साजिश
गहन जांच और सटीक सुरागों के आधार पर पुलिस ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर निवासी शिवम किरार और उसके साथी अभिषेक कुशवाहा को गिरफ्तार कर लिया। जब पुलिस ने इनसे कड़ाई से पूछताछ की, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। आरोपी शिवम किरार उसी फैक्ट्री में ऑपरेटर के पद पर तैनात था। अंदरूनी जानकारी होने का फायदा उठाकर उसने अपने साथी अभिषेक के साथ मिलकर इस पूरी चोरी की योजना बनाई और वारदात को अंजाम दिया।
ग्वालियर के बाजारों में सस्ते दामों पर बेचने की थी तैयारी
पूछताछ में आरोपियों ने कुबूल किया कि उनका इरादा फैक्ट्री से इतनी बड़ी तादाद में एलईडी लाइटें चुराकर उन्हें सुरक्षित ग्वालियर (मध्य प्रदेश) ले जाने का था। वहां वे इन मंहगी लाइटों को स्थानीय दुकानों और कबाड़ियों को बेहद कम दामों में बेचकर मोटी रकम कमाना चाहते थे। लेकिन इससे पहले कि वे माल को शहर से बाहर खपा पाते, पनकी पुलिस ने जाल बिछाकर दोनों को दबोच लिया।
पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई:
पनकी थाना पुलिस ने बताया कि बरामद माल को कब्जे में लेकर दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। दोनों को न्यायालय के समक्ष पेश कर जेल भेजा जा रहा है। इसके साथ ही पुलिस इस बात की भी गहनता से जांच कर रही है कि क्या इस चोरी में फैक्ट्री का कोई अन्य कर्मचारी या ग्वालियर का कोई खरीदार भी शामिल था। आरोपियों के पुराने आपराधिक इतिहास को भी खंगाला जा रहा है।








