ब्यूरो रिपोर्ट राहुल द्विवेदी कानपुर
फतेहपुर। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा सरकारी और ग्राम समाज की जमीनों को भू-माफियाओं से मुक्त कराने के सख्त निर्देशों के बावजूद, धरातल पर प्रशासनिक अमला और जनप्रतिनिधि ही इसमें पलीता लगाते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला असोथर विकासखंड की ग्राम पंचायत धरमपुर सातों (भगोनी का डेरा) से सामने आया है, जहाँ सरकारी नवीन परती भूमि पर बेखौफ तरीके से पक्का निर्माण कराया जा रहा है। ग्रामीणों ने इस अवैध निर्माण के पीछे क्षेत्रीय लेखपाल और ग्राम प्रधान की कथित मिलीभगत और संरक्षण होने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
जेसीबी से ढहाया गया था अतिक्रमण, प्रधान बदलते ही फिर शुरू हुआ ‘खेल’
राजस्व अभिलेखों के मुताबिक, ग्राम पंचायत धरमपुर सातों की गाटा संख्या 2733 सरकारी खाते में ‘नवीन परती’ के रूप में दर्ज है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस बेशकीमती सरकारी जमीन पर ननकू, विशाल पुत्र सेवक, गरीबे पुत्र कृष्णपाल, मुन्नू, गुड्डा पुत्र विजयी तथा पूची पुत्र धर्मराज द्वारा अवैध रूप से मकान का निर्माण कराया जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि पूर्व में इस मामले की शिकायत पर नायब तहसीलदार ने कड़ा रुख अपनाते हुए मौके पर ट्रैक्टर और जेसीबी लगवाकर उक्त अवैध निर्माण को पूरी तरह ध्वस्त करा दिया था। अतिक्रमण हटाने के बाद बकायदा इस सरकारी भूमि को ग्राम पंचायत के सुपुर्द (कब्जे) में सौंप दिया गया था। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जैसे ही ग्राम पंचायत की कमान नए प्रधान के हाथ में आई, कब्जाधारियों ने फिर से दीवारें खड़ी करना शुरू कर दिया।
प्रशासन को खुली चुनौती, विरोध करने वालों को दी जा रही धमकी!
गाँव में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि कब्जाधारियों को पीछे से किसी बड़े रसूख का वरदहस्त प्राप्त है। सूत्रों के मुताबिक, अवैध निर्माण करने वालों को कथित तौर पर यह भरोसा दिलाया गया है कि चाहे कोई भी प्रशासनिक अधिकारी आ जाए, उनका निर्माण कार्य नहीं रुकेगा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जो भी ग्रामीण इस अवैध कब्जे का विरोध कर रहे हैं, उन पर चौतरफा दबाव बनाने और उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है। शासन के जीरो टॉलरेंस की नीति के बीच चल रहा यह खेल सीधे तौर पर प्रशासनिक व्यवस्था को खुली चुनौती दे रहा है।
लेखपाल के कबूलनामे ने खोला राज, चुनावी नफे-नुकसान के लिए दांव पर सरकारी जमीन
इस पूरे मामले में उस वक्त बेहद चौंकाने वाला मोड़ आ गया, जब मीडिया संवाददाता द्वारा क्षेत्रीय लेखपाल रामप्रकाश से इस बाबत सीधा सवाल किया गया। लेखपाल के बयान ने यह साफ कर दिया कि कानून की धज्जियां उड़ाने में ग्राम प्रधान की क्या भूमिका है।
“मैं खुद मौके पर गया था और मकान बनाने वालों को कड़े लहजे में निर्माण कार्य रोकने के लिए मना किया था। लेकिन इस पर स्थानीय ग्राम प्रधान ने मुझसे कहा कि ‘चुनाव नजदीक हैं, इसलिए अभी लोगों को रहने दिया जाए, निर्माण मत रुकवाइए।'”
— रामप्रकाश, क्षेत्रीय लेखपाल
लेखपाल के इस ऑन-रिकॉर्ड बयान के बाद अब यह साफ हो गया है कि चुनावी वोट बैंक को साधने के लिए सरकारी जमीन की बंदरबांट की जा रही है।
उच्चाधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी ग्रामीणों की निगाहें
एक तरफ सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का साफ निर्देश है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ एंटी-भूमाफिया टास्क फोर्स के तहत कार्रवाई की जाए और जरूरत पड़ने पर बुलडोजर चलाया जाए। वहीं दूसरी तरफ धरमपुर सातों में सरेआम हो रहे इस निर्माण से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। अब देखना यह होगा कि मामले की भनक लगने के बाद जिला प्रशासन और संबंधित उपजिलाधिकारी (SDM) इस पर क्या एक्शन लेते हैं। क्या सरकारी जमीन को मुक्त कराकर दोषियों पर कार्रवाई होगी, या फिर चुनावी राजनीति के आगे प्रशासन मौन साधे रहेगा?








