फतेहपुर: बुधवार को जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर उस समय थर्रा उठा, जब एक महिला ने जिलाधिकारी कार्यालय के ठीक बाहर खुद पर डीजल डालकर आत्मदाह करने की कोशिश की। इस घटना से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया और परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, खागा कोतवाली क्षेत्र के ग्राम हसनपुर अकोढ़िया निवासी लीलावती (पत्नी शिवचरन) बुधवार सुबह अपनी फरियाद लेकर कलेक्ट्रेट पहुँची थीं। अचानक उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर खुद पर ज्वलनशील पदार्थ (डीजल) उड़ेल लिया। इससे पहले कि वह माचिस जलाकर खुद को आग के हवाले कर पातीं, मौके पर तैनात सतर्क सुरक्षाकर्मियों ने फुर्ती दिखाते हुए उनके हाथ से माचिस छीन ली और उन्हें काबू में कर लिया। सुरक्षाकर्मियों की तत्परता ने एक बड़ी अनहोनी को होने से रोक लिया।
न्याय न मिलने से थी हताश
पूछताछ के दौरान महिला ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। लीलावती का कहना है कि वह पिछले दो वर्षों से अपने मामले को लेकर दर-दर भटक रही है, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही।
विवाद की जड़: महिला का अपने सगे भाइयों के साथ पैतृक संपत्ति और आर्थिक लेन-देन का विवाद है।
भाई के इलाज और निर्माण में खर्च किए पैसे: लीलावती ने बताया कि वह अपने अविवाहित भाई प्रमोद के साथ रहती थी। वर्ष 2024 में भाई की मृत्यु के बाद से अन्य भाई उस मकान और संपत्ति पर दावा ठोक रहे हैं, जबकि महिला का कहना है कि उसने स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर भाई के इलाज और घर के निर्माण में लाखों रुपये खर्च किए हैं।
प्रशासन का पक्ष
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने महिला को सुरक्षा घेरे में ले लिया। अपर पुलिस अधीक्षक ज्ञान प्रकाश ने बताया कि महिला की शिकायत को अत्यंत गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा, “प्रारंभिक जांच में मामला पारिवारिक संपत्ति और आर्थिक विवाद से जुड़ा है। महिला के आरोपों की गहन जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कड़ी विधिक कार्रवाई की जाएगी।”
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
कलेक्ट्रेट जैसे अति संवेदनशील परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए किसी महिला का डीजल लेकर अंदर तक पहुँच जाना और आत्मदाह की कोशिश करना बड़ी सुरक्षा चूक की ओर इशारा करता है। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई ने बड़ी दुर्घटना टाल दी, लेकिन न्याय की आस में एक महिला का इस हद तक विवश हो जाना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।








