रिपोर्ट: सत्येंद्र कुमार वर्मा, धाता
फतेहपुर: विकास के दावों के बीच ब्लॉक धाता अंतर्गत ग्राम सभा अजरौली की तस्वीर बेहद भयावह है। गाँव की गलियां तालाब में तब्दील हो चुकी हैं, जिससे यहाँ का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। जलभराव के कारण रास्तों पर चलना जानलेवा साबित हो रहा है, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
कीचड़ और जलभराव से गुजरना मजबूरी
ग्रामवासियों का कहना है कि जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने से गलियों में घुटनों तक गंदा पानी भरा रहता है। हालात इतने खराब हैं कि यहाँ से गुजरना किसी जोखिम से कम नहीं है। स्कूल जाने वाले बच्चे और बुजुर्ग अक्सर फिसलकर चोटिल हो रहे हैं। किसान अपनी उपज और पशुओं के साथ रास्तों से गुजरने में लाचार हैं। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरा बनी हुई है, बल्कि संक्रामक बीमारियों के फैलने का भी डर सता रहा है।
बीडीओ कार्यालय में गुहार, फिर भी कोई सुनवाई नहीं
ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन और बीडीओ (खंड विकास अधिकारी) महोदय को लिखित शिकायतें दी हैं। कई बार गुहार लगाने के बावजूद अब तक न तो जल निकासी का कोई प्रबंध किया गया और न ही रास्ते की मरम्मत की दिशा में कोई कदम उठाए गए हैं। बार-बार मिल रहे आश्वासन से निराश ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश है।
कब बदलेगी गाँव की तस्वीर?
स्थानीय निवासी अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि ‘आखिर गाँव का विकास कब होगा?’ ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, जबकि सरकारी तंत्र फाइलों में विकास की गाथा लिख रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है ताकि उन्हें इस नारकीय स्थिति से मुक्ति मिल सके।
संपादकीय टिप्पणी: क्या सरकारी योजनाओं का उद्देश्य गाँव की इन बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं है? यदि बीडीओ कार्यालय तक शिकायत पहुँचने के बाद भी कार्य नहीं हो रहा, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही है। स्थानीय प्रशासन को तुरंत मौके का मुआयना कर जल निकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।








