फतेहपुर: क्या उत्तर प्रदेश के नियम-कानून फतेहपुर की सरहदों पर दम तोड़ देते हैं? असोथर नगर पंचायत की सड़कों का मंजर तो यही गवाही दे रहा है। यहाँ मर्का खण्ड–3 (पहलवान ट्रेडर्स प्राइवेट लिमिटेड) की खदान से निकले ओवरलोड ट्रक विकास की नहीं, बल्कि विनाश की गाथा लिख रहे हैं।
■ काले कारनामे: नंबर प्लेट पर ‘कालिख’ का खेल
हैरानी की बात यह है कि सड़कों पर दौड़ रहे इन ‘यमदूतों’ की कोई पहचान नहीं है। दर्जनों ट्रक ऐसे हैं जिनकी नंबर प्लेट पर या तो कालिख पोती गई है या उन्हें पेंट से मिटा दिया गया है। > सवाल सीधा है: अगर ये ट्रक वैध हैं, तो अपनी पहचान छिपाने की क्या मजबूरी है? क्या यह किसी बड़ी दुर्घटना के बाद भाग निकलने की पूर्व-नियोजित साजिश है?
■ धूल के गुबार में गुम होता बचपन
असोथर की हवा अब सांस लेने लायक नहीं रही। ट्रकों से उड़ती मोरंग की धूल ने पूरे इलाके को ‘गैस चैंबर’ बना दिया है।
स्कूली बच्चे: आंखों में जलन और फेफड़ों में जहर लेकर स्कूल जाने को मजबूर।
दुकानदार: धूल की वजह से कारोबार चौपट, दिनभर चेहरे पर मास्क लगाने की नौबत।
राहगीर: संकरी सड़कों पर ओवरलोड ट्रकों के बीच से निकलना मौत को दावत देने जैसा।
■ कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन
खनिज विभाग से लेकर परिवहन विभाग (ARTO) तक, सबकी खामोशी इस ‘अवैध साम्राज्य’ को खाद-पानी दे रही है। दिखावे के लिए तिरपाल तो डाले जाते हैं, लेकिन वे उड़ती धूल को रोकने में पूरी तरह नाकाम हैं। जनता पूछ रही है कि पहलवान ट्रेडर्स के इन ट्रकों पर आखिर किसका वरदहस्त है, जो ये कानून को ठेंगे पर रखकर सरेआम सीनाजोरी कर रहे हैं?
निष्कर्ष: हादसे का इंतजार या एक्शन?
असोथर की जनता अब आक्रोशित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन किसी बड़े खून-खराबे या मासूम की जान जाने का इंतजार कर रहा है। फर्जी नंबर प्लेट और ओवरलोडिंग का यह खेल अब जानलेवा साबित हो रहा है।
क्या फतेहपुर का जिला प्रशासन इन ‘बेखौफ माफियाओं’ पर नकेल कसेगा या फिर असोथर की जनता यूँ ही जहर निगलने को मजबूर रहेगी?









