बांदा/लखनऊ। निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा अभिभावकों और छात्रों के आर्थिक व मानसिक शोषण का मुद्दा अब गरमाता जा रहा है। बांदा सदर विधानसभा क्षेत्र से विधायक प्रकाश द्विवेदी ने इस गंभीर विषय पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने और कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।
शिक्षा को बना दिया गया है व्यापार: विधायक
विधायक प्रकाश द्विवेदी ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि निजी स्कूल शिक्षा को सेवा के बजाय व्यवसाय बना चुके हैं। उन्होंने कहा कि हर साल निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें और पाठ्यक्रम बदलकर अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। इससे न केवल संसाधनों की बर्बादी हो रही है, बल्कि पुराने बच्चों की पुस्तकें छोटे भाई-बहनों के काम भी नहीं आ पा रही हैं।
बच्चों की सेहत और पर्यावरण पर भी चिंता
पत्र में विधायक ने बच्चों के बस्ते (स्कूल बैग) के बढ़ते वजन को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि निर्धारित मानकों के विपरीत बच्चों को भारी बोझ ढोने के लिए विवश किया जा रहा है, जिससे उनके शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। साथ ही, हर साल अनावश्यक रूप से बदली जाने वाली पुस्तकों के कारण कागजों की बर्बादी हो रही है, जिससे पर्यावरण को भी भारी क्षति पहुँच रही है।
विधायक द्वारा मुख्यमंत्री से की गई प्रमुख मांगें:
विधायक प्रकाश द्विवेदी ने जनहित में निम्नलिखित 7 सूत्रीय मांगें रखी हैं:
समान पाठ्यक्रम: पूरे प्रदेश में एक समान पाठ्यक्रम लागू किया जाए।
NCERT की अनिवार्यता: सभी निजी स्कूलों में NCERT आधारित शिक्षा अनिवार्य हो।
मूल्य नियंत्रण: पुस्तकों के मूल्य निर्धारण और प्रकाशकों पर नियंत्रण हेतु सख्त व्यवस्था बने।
बैग का वजन: स्कूल बैग के वजन संबंधी नियमों का कड़ाई से पालन हो।
जांच समिति: जनपद स्तर पर विशेष जांच समिति गठित कर निजी स्कूलों की फीस संरचना और पुस्तक चयन की जांच कराई जाए।
जवाबदेही: लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
शिकायत तंत्र: अभिभावकों के लिए प्रभावी और पारदर्शी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित हो।








