रिपोर्ट: राहुल द्विवेदी, ब्यूरो चीफ, कानपुर (इंडिया वार्ता न्यूज़)
विशेषाधिकार समिति को मामला सौंपने की मांग; कहा— “प्रशासनिक संरक्षण में हुआ लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन, जारी रहेगी जनहित की लड़ाई।”
लखनऊ/कानपुर। उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त एक बड़ी खबर आ रही है। लखनऊ स्थित विधानभवन में एक विधायक ने माननीय विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना से मुलाकात कर अपने विधानसभा क्षेत्र में हुए high-profile घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दी। मुलाकात के दौरान विधायक ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि उनके और उनके समर्थकों के साथ लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर अभद्र व्यवहार किया गया है।
विकास कार्य के शिलान्यास में रोड़ा अटकाने का आरोप
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को सौंपे पत्र और मुलाकात के दौरान विधायक ने बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में विधायक निधि से स्वीकृत विकास कार्यों का शिलान्यास कार्यक्रम तय था। आरोप है कि इस दौरान उन्हें न सिर्फ कार्यक्रम करने से रोका गया, बल्कि उनके साथ बेहद अभद्र व्यवहार भी किया गया।
विधायक ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को जनता के विकास कार्यों से और उसके अपने ही क्षेत्र में रोकना लोकतांत्रिक परंपराओं और जनप्रतिनिधियों के विशेषाधिकारों व गरिमा के सीधे तौर पर खिलाफ है।
प्रशासनिक संरक्षण में हुई एकपक्षीय कार्रवाई, गरीब मजदूर से मारपीट का मुद्दा गूंजा
मुलाकात के दौरान विधायक ने क्षेत्र में अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ हुए कथित अन्यायपूर्ण व्यवहार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रशासनिक संरक्षण में नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। एक गरीब मजदूर के साथ बर्बरता से मारपीट की गई और बाद में पूरे मामले में दबाव व प्रभाव के चलते एकपक्षीय कार्रवाई को अंजाम दिया गया, जिससे स्थानीय जनभावनाएं बेहद आहत हैं।
विशेषाधिकार समिति से निष्पक्ष जांच की मांग
विधायक ने इस पूरे गंभीर प्रकरण को विधानसभा की ‘विशेषाधिकार समिति’ (Privilege Committee) को संदर्भित किए जाने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
“यह संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष या अधिकारी के खिलाफ निजी लड़ाई नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों, जनप्रतिनिधियों की गरिमा और जनता के हक के विकास कार्यों की रक्षा के लिए लड़ा जा रहा आंदोलन है। जनप्रतिनिधियों के अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होना बेहद आवश्यक है।”
इसके साथ ही उन्होंने इस जनहित की लड़ाई में मजबूती से साथ खड़े रहने वाले सभी समर्थकों, कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों का आभार भी व्यक्त किया।
राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज
लखनऊ से लेकर क्षेत्रीय राजनीति तक इस मुलाकात के बाद से ही हलचल और चर्चाएं बेहद तेज हो गई हैं। एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि द्वारा सीधे विधानसभा अध्यक्ष के सामने विशेषाधिकार हनन का मुद्दा उठाए जाने के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस मामले के विशेषाधिकार समिति के पास जाने के बाद दोषी अधिकारियों और संलिप्त लोगों पर आगे क्या कड़ी कार्रवाई होती है।








