असोथर क्षेत्र में रात-दिन मिट्टी का अवैध खनन, यमुना कछार के 5 गांवों में उजड़ रहा पर्यावरण

 

चांदमारी की सरकारी जमीन को भी नहीं बख्शा; पुलिस और राजस्व विभाग मौन, उठ रहे मिलीभगत के सवाल

असोथर/फतेहपुर:

असोथर थाना क्षेत्र में इन दिनों अवैध मिट्टी खनन का काला कारोबार पूरी तरह बेलगाम हो चुका है। यमुना कछार के पांच प्रमुख गांवों—जरौली, सरकंडी, मैकुवापुर, कठौता और बदलेवा—में दिन-रात जेसीबी मशीनें गरज रही हैं। नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से की जा रही इस खुदाई से न सिर्फ पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी लाखों का चूना लगाया जा रहा है।

हैरानी की बात तो यह है कि सरकंडी में पुलिस विभाग के आधीन आने वाली चांदमारी की जमीन को भी खनन माफियाओं ने नहीं बख्शा और उसे भी खोद डाला।

नियम-कानून ताक पर, बिना परमिशन जारी है खेल

विकास कार्यों, प्लॉट की भराई और निर्माण कार्यों के लिए मिट्टी की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन नियमानुसार इसके लिए बाकायदा पट्टा या परमिशन लेनी होती है और शासन को रॉयल्टी जमा करनी पड़ती है।

असोथर क्षेत्र में इसके ठीक उलट काम हो रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि:

क्षेत्र में 8 से 10 जेसीबी मशीनें अवैध रूप से मिट्टी खोद रही हैं।

दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉली और भारी डंपर ओवरलोड होकर इस मिट्टी को ऊंचे दामों पर बाजार में बेच रहे हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सरकंडी पुलिस चौकी के ठीक अगल-बगल ये मशीनें दिन-रात गरजती हैं, लेकिन जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं।

पर्यावरण और सड़कों पर मंडराया संकट

इस अवैध और अनियंत्रित खनन के कारण ग्रामीण इलाकों में गंभीर संकट खड़ा हो गया है:

उर्वरता और भूजल: खेतों की ऊपरी उपजाऊ मिट्टी नष्ट होने से जमीन की उर्वरता खत्म हो रही है और क्षेत्र का भूजल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है।

भौगोलिक ढांचा: यमुना कछार में अत्यधिक खुदाई के कारण पानी के बहाव और कटाव से भौगोलिक स्थिति प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है।

सड़कें हुईं ध्वस्त: ओवरलोड डंपरों और ट्रैक्टरों के दिन-रात दौड़ने से ग्रामीण सड़कें पूरी तरह टूट चुकी हैं, जिससे ग्रामीणों का चलना दूभर हो गया है।

डीएम के आदेश भी बेअसर

जिले के जिलाधिकारी (डीएम) द्वारा रात के समय हर तरह के जायज-नाजायज खनन पर सख्त रोक लगाई गई है। इसके बावजूद असोथर में रात-दिन खनन जारी रहना यह साफ करता है कि इन माफियाओं को किसी रसूखदार या स्थानीय तंत्र का मजबूत संरक्षण प्राप्त है।

अधिकारियों के विरोधाभासी बयान:

इस पूरे मामले पर जब ‘असोथर’ के जिम्मेदार अधिकारियों से बात की गई, तो उनके बयानों से साफ जाहिर होता है कि विभाग जमीनी हकीकत से कितना दूर हैं:

अधिकारी का नाम व पद बयान

देशराज पटेल (खनिज अधिकारी) “जरौली और सरकंडी क्षेत्र में मिट्टी खनन की कोई भी परमिशन वर्तमान में सक्रिय नहीं है।”

अमरेश कुमार (तहसीलदार) “फिलहाल हमारे पास मिट्टी खनन से जुड़ी ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है।”

खनिज अधिकारी के बयान से यह तो साफ है कि हो रहा खनन पूरी तरह अवैध है, लेकिन तहसीलदार का यह कहना कि ‘शिकायत नहीं मिली’, प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।

ग्रामीणों ने की कड़ी कार्रवाई की मांग

क्षेत्रीय नागरिकों ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई है कि इस अवैध खनन को तत्काल रुकवाया जाए। साथ ही, न सिर्फ खनन करने वाले कारोबारियों पर बल्कि उन्हें शह देने वाले और आंखें मूंदने वाले दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

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Author: India Varta News

Mohit Chakraborty is the Founder and Editor-in-Chief of India Varta News. He is actively involved in journalism and social service from Fatehpur, Uttar Pradesh. His mission is to deliver unbiased, factual, and public-interest journalism while highlighting local, regional, and national issues. He believes that media is a powerful tool for positive social change.

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