हाईकोर्ट की सख्ती से यूपी की ‘बाहुबली राजनीति’ में हड़कंप, बृजभूषण, राजा भैया और धनंजय सिंह के शस्त्र लाइसेंसों पर जांच की तलवार

 

इंडिया वार्ता न्यूज़ (आईवीएन) ब्यूरो

कानपुर। ब्यूरो चीफ: राहुल द्विवेदी

प्रयागराज/कानपुर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में रसूख, बाहुबल और सरकारी संरक्षण के दम पर शस्त्र लाइसेंस चमकाने वाले सफेदपोशों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा शिकंजा कस दिया है। कोर्ट की इस अभूतपूर्व सख्ती से यूपी के सियासी गलियारों और बाहुबली नेटवर्क में जबरदस्त हड़कंप मच गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य के कई प्रभावशाली नेताओं और कथित बाहुबलियों के शस्त्र लाइसेंसों की सघन जांच के आदेश देते हुए प्रदेश सरकार से उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि (क्रिमिनल हिस्ट्री) और उन्हें मुहैया कराई गई सरकारी सुरक्षा (गनर) का पूरा ब्यौरा तलब कर लिया है।

कोर्ट का तल्ख सवाल: अपराधियों को किस आधार पर मिले और रिन्यू हुए लाइसेंस?

एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बेहद तल्ख रुख अख्तियार किया। अदालत ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है कि जिन लोगों पर संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, उन्हें किस कानून के तहत शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए? इतना ही नहीं, सालों से उनका नवीनीकरण (रिन्यूअल) किस आधार पर किया जाता रहा? अदालत ने यह भी पूछा कि राज्य में किन-किन रसूखदारों को सरकारी खर्च पर सुरक्षा कवच दिया गया है और उसके पीछे का ठोस कारण क्या है।

बृजभूषण शरण सिंह, राजा भैया और धनंजय सिंह समेत कई दिग्गजों के नामों की चर्चा

न्यायालय की इस कार्रवाई के बाद जिन प्रमुख चेहरों की फाइलें दोबारा खुलने की चर्चा जोरों पर है, उनमें:

पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह

कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया

पूर्व सांसद धनंजय सिंह

समेत उत्तर प्रदेश के कई अन्य कद्दावर और प्रभावशाली नेताओं के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। इन नेताओं के शस्त्र लाइसेंस और सुरक्षा घेरे को लेकर कोर्ट की नजर अब टेढ़ी हो चुकी है।

यूपी में 6000 दागी चेहरों के पास हैं ‘सरकारी हथियार’

इससे पहले प्रदेश सरकार द्वारा अदालत के सामने पेश किए गए आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। सरकार ने कोर्ट को सूचित किया था कि पूरे उत्तर प्रदेश में इस वक्त 10 लाख से अधिक शस्त्र लाइसेंस एक्टिव हैं। बेहद चिंताजनक बात यह है कि इनमें से करीब 6000 शस्त्र लाइसेंस ऐसे लोगों के पास हैं, जिनका सीधा आपराधिक इतिहास है और जिन पर गंभीर मामले दर्ज हैं। सरकार के इसी कबूलनामे के बाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस विस्तृत जांच और रिपोर्ट की मांग की है।

सियासी गलियारों में सुगबुगाहट: बदलेगी यूपी की राजनीति की दिशा?

राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि हाईकोर्ट का यह आदेश महज एक प्रशासनिक जांच तक सीमित नहीं रहने वाला है। आने वाले दिनों में यह कदम यूपी की “बाहुबली राजनीति” और अपराधियों को मिलने वाले राजनीतिक संरक्षण की जड़ों पर बड़ा प्रहार साबित हो सकता है। यदि अदालत की सीधी निगरानी में यह कार्रवाई आगे बढ़ती है, तो कई बड़े दिग्गजों का कानूनी शिकंजे में फंसना तय है।

हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि इससे यूपी की राजनीति का चेहरा तुरंत बदलेगा या नहीं, यह कहना जल्दबाजी होगी; लेकिन इस ऐतिहासिक कदम ने सत्ता, शासन और बाहुबली गठजोड़ के बीच के समीकरणों पर एक नई और तीखी बहस जरूर छेड़ दी है।

India Varta News
Author: India Varta News

Mohit Chakraborty is the Founder and Editor-in-Chief of India Varta News. He is actively involved in journalism and social service from Fatehpur, Uttar Pradesh. His mission is to deliver unbiased, factual, and public-interest journalism while highlighting local, regional, and national issues. He believes that media is a powerful tool for positive social change.

Leave a Comment