फतेहपुर: तीन नगर पंचायतों के प्रभार वाली EO देवहुति पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, सरकारी खजाने की ‘आहुति’ देने का खेल उजागर!

 

फतेहपुर। जिले के नगर निकायों में सत्ता के संरक्षण में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का एक बड़ा खेल सामने आया है। खागा, हथगांम और धाता सहित तीन नगर पंचायतों का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहीं अधिशाषी अधिकारी (EO) देवहुति पांडे पर सरकारी धन के दुरुपयोग, बोगस टेंडरिंग और चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। चर्चा है कि रसूखदार नेताओं के संरक्षण के चलते प्रशासनिक अधिकारियों की नाक के नीचे यह पूरा खेल धड़ल्ले से चल रहा है।

1. गैर-जनपदों के ठेकेदारों से ‘सेटिंग’ और कमीशनखोरी का खेल

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि नगर पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों में बोगस टेंडरिंग का सहारा लिया जा रहा है। रायबरेली और कौशांबी जैसे बाहरी जिलों से चहेते ठेकेदारों को बुलाकर गुपचुप तरीके से काम सौंपे जा रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि इन ठेकेदारों से मोटा कमीशन वसूला जाता है, और कुछ मामलों में तो नगर निकाय के अध्यक्षों और अधिशाषी अधिकारी (EO) की सीधी हिस्सेदारी (पार्टनरशिप) होने की भी बात सामने आ रही है।

2. कान्हा गौशाला में गौवंशों की संख्या का ‘बंदरबांट’, जांच ठंडे बस्ते में

विगत वर्ष खागा स्थित कान्हा गौशाला में हुए बड़े घोटाले को लेकर भी ईओ देवहुति पांडे विवादों के घेरे में रही हैं। आरोप है कि गौशाला में वास्तविक गौवंशों की संख्या कम होने के बावजूद कागजों पर अधिक संख्या दिखाकर सरकारी बजट का बड़े पैमाने पर बंदरबांट किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस गंभीर घपले की जांच शुरू तो हुई, लेकिन उसकी फाइल अब धूल फांक रही है और आज तक जांच पूरी नहीं हो सकी।

3. कानपुर से रोजाना ‘अप-डाउन’ और सरकारी तेल का खेल

दिखाने के लिए ईओ का कमरा फतेहपुर जिला मुख्यालय में आवंटित है, लेकिन वह रोजाना अपने निजी वाहन से कानपुर से आवागमन (अप-डाउन) करती हैं। इस आवागमन के खर्च को लेकर भी विभाग में ‘पर्ची किसी की और तेल कहीं का’ वाला खेल खेला जा रहा है, जिससे सरकारी राजस्व को भारी चूना लग रहा है।

डीएम के समाधान दिवस से रहती हैं नदारद!

खागा में यह आम चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब भी जिलाधिकारी की अध्यक्षता में तहसील समाधान दिवस का आयोजन होता है, ईओ देवहुति पांडे अक्सर अवकाश या अनुपस्थिति का बहाना बनाकर गायब हो जाती हैं। हाल ही में हुए समाधान दिवस के दौरान जब जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स ने ईओ को तलब किया, तो उनकी जगह एक अदना कर्मचारी पहुंचा। मौके पर मौजूद अन्य अधिकारियों में भी यह फुसफुसाहट रही कि ‘मैडम तो आज छुट्टी पर होंगी’। जिले की मुखिया के सामने न आने की यह रणनीति कई तरह के सवाल खड़े करती है।

सत्ता का संरक्षण और रसूख का ‘वहम’

तीन-तीन नगर पंचायतों (खागा, हथगांम और धाता) का कार्यभार संभाल रहीं अधिशाषी अधिकारी के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें उच्चाधिकारियों की कार्रवाई का कोई खौफ नहीं दिख रहा है। कहा जा रहा है कि सत्ताधारी दल के कुछ बड़े नेताओं का वरदहस्त प्राप्त होने के कारण ही वह नियमों को ताक पर रखकर मनमानी कर रही हैं।

निष्कर्ष: कब शुरू होगी निष्पक्ष जांच?

कागजों पर ‘आदर्श नगर पंचायत’ का तमगा रखने वाले इन निकायों में हो रहे इस बड़े खेल से जिले के आला अधिकारी अब तक अनजान बने हुए हैं। जनता के टैक्स के पैसे और सरकारी खजाने के इस दुरुपयोग पर अगर उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच बैठती है, तो भ्रष्टाचार का एक बड़ा पुलिंदा खुलना तय है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर क्या एक्शन लेता है और इस ‘जांच की आंच’ की जद में कौन-कौन से बड़े नाम आते हैं।

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Author: India Varta News

Mohit Chakraborty is the Founder and Editor-in-Chief of India Varta News. He is actively involved in journalism and social service from Fatehpur, Uttar Pradesh. His mission is to deliver unbiased, factual, and public-interest journalism while highlighting local, regional, and national issues. He believes that media is a powerful tool for positive social change.

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