कानपुर ब्यूरो चीफ: राहुल द्विवेदी
कानपुर, 24 मई 2026
कानपुर पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय परिसर से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक संवेदनशील मामले की कवरेज करने गए पत्रकार के साथ अभद्रता और मारपीट की गई। ‘स्ट्रॉन्ग भारत न्यूज़’ के चीफ एडिटर राजेंद्र केसरवानी ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और कानपुर के पुलिस कमिश्नर को शिकायती पत्र भेजकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित पत्रकार राजेंद्र केसरवानी के अनुसार, वे पिछले कुछ दिनों से चर्चित आईटीबीपी (Indo-Tibetan Border Police) जवान मामले की लगातार ग्राउंड कवरेज कर रहे हैं। इसी सिलसिले में 23 मई 2026 को दोपहर लगभग 3:00 बजे वह अपनी टीम के साथ पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय पहुंचे थे।
राजेंद्र केसरवानी का आरोप है कि कार्यालय परिसर में ही समाचार की माइक आईडी लगाने को लेकर विवाद शुरू हुआ। इसके बाद कथित पत्रकार तासिफ खान (निवासी: कुलीबाजार) और विक्रम सिंह उर्फ गोलू (निवासी: परमट) ने अपने 4-5 अज्ञात साथियों के साथ मिलकर उनके साथ धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और मारपीट की। आरोपियों ने उन्हें कवरेज करने से भी जबरन रोका।
सीसीटीवी के सामने गुंडागर्दी, कानून का खौफ नहीं
शिकायती पत्र में इस बात का विशेष उल्लेख किया गया है कि यह पूरी वारदात पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के ठीक सामने हुई। पीड़ित का कहना है कि पुलिस महकमे के सबसे बड़े दफ्तर में इस तरह की घटना को अंजाम देना यह दर्शाता है कि आरोपियों में कानून और खाकी का कोई खौफ नहीं है।
“कुछ लोग पत्रकारिता की आड़ में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं, जिससे इस पवित्र पेशे की छवि धूमिल हो रही है। ऐसे तत्वों पर नकेल कसना बेहद जरूरी है।”
— राजेंद्र केसरवानी, चीफ एडिटर (स्ट्रॉन्ग भारत न्यूज़)
कृष्णा हॉस्पिटल से ‘साठगांठ’ की आशंका: कॉल डिटेल जांच की मांग
मामले में एक नया मोड़ देते हुए राजेंद्र केसरवानी ने आशंका जताई है कि इस हमले के तार कृष्णा हॉस्पिटल से जुड़े हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि वह आईटीबीपी जवान के इलाज में अस्पताल की कथित लापरवाही की खबर को लगातार उजागर कर रहे हैं।
आरोप है कि कुछ लोग अस्पताल प्रबंधन से साठगांठ कर और मोटी रकम लेकर इस खबर को दबवाने की साजिश रच रहे हैं। पीड़ित पत्रकार ने पुलिस कमिश्नर से मांग की है कि आरोपियों के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) की गहनता से जांच की जाए, ताकि इस पूरी साजिश के पीछे छिपे सफेदपोशों और अस्पताल के गुर्गों का पर्दाफाश हो सके।
जान का खतरा, सुरक्षा की गुहार
राजेंद्र केसरवानी ने मुख्यमंत्री और पुलिस प्रशासन को भेजे पत्र में यह भी अंदेशा जताया है कि भविष्य में उन पर या उनके कैमरामैन आर.के. सिंह पर कोई भी अप्रिय या जानलेवा हमला हो सकता है। उन्होंने मांग की है कि यदि भविष्य में उनके साथ कोई अनहोनी होती है, तो उक्त नामजद आरोपियों को ही इसके लिए जिम्मेदार माना जाए और उन्हें जांच के दायरे में रखा जाए।
फिलहाल, पीड़ित पत्रकार ने पुलिस प्रशासन से आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में तत्काल एफआईआर दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने की अपील की है। अब देखना यह है कि हाई-प्रोफाइल कमिश्नरेट परिसर में हुई इस गुंडागर्दी पर कानपुर पुलिस क्या एक्शन लेती है।








