
सुप्रीम कोर्ट द्वारा 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए भी टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ शिक्षकों ने निर्णायक जंग का ऐलान कर दिया है। ‘टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (TFI) के बैनर तले विभिन्न शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति तैयार की है।
22 फरवरी से ‘एक्स’ पर अभियान, 26 को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ वाराणसी के वरिष्ठ शिक्षक नेता सनत कुमार सिंह ने बताया कि रविवार को लखनऊ स्थित शिक्षक भवन में हुई उच्च स्तरीय बैठक में आंदोलन की रूपरेखा तय की गई। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चन्द्र शर्मा के नेतृत्व में तय कार्यक्रम के अनुसार:
22 फरवरी: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) पर राष्ट्रव्यापी हैशटैग अभियान।
23 से 25 फरवरी: प्रदेश के समस्त शिक्षक काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराते हुए शिक्षण कार्य करेंगे।
26 फरवरी: सभी जिलों में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय पर विशाल धरना।
BSA से जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल मार्च
सनत कुमार सिंह ने जानकारी दी कि 26 फरवरी को धरने के पश्चात शिक्षक बीएसए कार्यालय से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकालेंगे। इस दौरान जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें पुराने शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त रखने की मांग की जाएगी।
मार्च में दिल्ली के रामलीला मैदान में गूंजेगी शिक्षकों की आवाज
आंदोलन को केवल प्रदेश स्तर तक सीमित न रखते हुए, इसे दिल्ली तक ले जाने की तैयारी है। मार्च के तीसरे सप्ताह में नई दिल्ली के रामलीला मैदान में एक महारैली का आयोजन किया जाएगा। इस एकजुटता में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के साथ-साथ जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ और राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पदाधिकारी भी कंधे से कंधा मिलाकर शामिल हो रहे हैं।
“2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर सेवा में बने रहने के लिए टीईटी थोपना उनके अनुभव और सेवा सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। सभी संगठनों की एकजुटता शिक्षक हित में एक बड़ा बदलाव लाएगी।”
— सनत कुमार सिंह, वरिष्ठ शिक्षक नेता








