असोथर मंडी में ताला, अन्नदाता बदहाल: डेढ़ महीने से भटक रहे किसान ने दी आत्मदाह की चेतावनी!

फतेहपुर (असोथर)। उत्तर प्रदेश सरकार के ‘धान खरीद’ के बड़े-बड़े दावों की जमीनी हकीकत फतेहपुर की असोथर मंडी में तार-तार होती दिख रही है। यहाँ पिछले डेढ़ महीने से केंद्र पर ताला लटका है, जिससे गुस्साए और हताश किसान अब आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हैं। अंदीपुर घरवासीपुर के एक किसान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द तौल नहीं हुई, तो वह आत्महत्या कर लेगा।

कागजों में खरीद, जमीन पर ‘तालाबंदी’

क्षेत्र के किसान नकुल सिंह का दर्द पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। उनके पास 70 कुंतल धान का वैध सत्यापन पत्र है, लेकिन दो महीने से वह सिर्फ मंडी के चक्कर काट रहे हैं। किसान का आरोप है कि:

मंडी केंद्र पर पिछले 45 दिनों से ताला लटका हुआ है।

अधिकारी आश्वासन तो देते हैं, लेकिन मौके पर कोई जिम्मेदार व्यक्ति नहीं मिलता।

हैरानी की बात यह है कि जहाँ धरातल पर तौल बंद है, वहीं कागजों में खरीद प्रक्रिया जारी दिखाई जा रही है।

30% किसान अब भी कतार में, बर्बादी की कगार पर फसल

असोथर क्षेत्र के लगभग 30 प्रतिशत किसानों का धान आज भी खुले आसमान के नीचे पड़ा है। मौसम और नमी के कारण फसल खराब होने की कगार पर है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक चोट पहुँच रही है। किसान नकुल सिंह ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र भेजकर गुहार लगाई है कि उनकी मेहनत की फसल खरीदी जाए, अन्यथा उनके पास जीवन समाप्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

अधिकारियों का पल्ला झाड़ने वाला रवैया

इस पूरे प्रकरण पर जब डिप्टी आरएमओ शमीर शुक्ला से बात की गई, तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए गेंद केंद्र प्रभारियों के पाले में डाल दी। उन्होंने कहा:

“मंडी का गेट बंद करने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं है। यह केंद्र प्रभारियों की मनमानी हो सकती है। किसान का धान नियमानुसार खरीदा जाएगा।”

मुख्य बिंदु: भ्रष्टाचार या लापरवाही?

सत्यापन के बाद भी इंतजार: जब प्रशासन ने धान का सत्यापन कर दिया है, तो तौल में देरी क्यों?

जिम्मेदारी किसकी?: डिप्टी आरएमओ और केंद्र प्रभारियों के बीच की खींचतान में किसान क्यों पिस रहा है?

प्रशासनिक चुप्पी: क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी (किसान की आत्महत्या) का इंतजार कर रहा है?

निष्कर्ष: असोथर मंडी की यह तस्वीर शासन के “भ्रष्टाचार मुक्त खरीद” के दावों पर बड़ा तमाचा है। अब देखना यह है कि जिलाधिकारी इस मामले में कब तक हस्तक्षेप करते हैं और किसान को उसका हक दिला पाते हैं।

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Author: India Varta News

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