9 मार्च को 52वीं बार प्रधानमंत्री को रक्त से लिखा जाएगा पत्र; आंदोलन को धार देने की तैयारी
फतेहपुर। बुंदेलखंड राज्य आंदोलन के पुरोधा और जननायक स्वर्गीय शंकर लाल मेहरोत्रा (शंकर भैया) की 78वीं जयंती आगामी 9 मार्च को पूरे क्षेत्र में ‘बुंदेलखंड दिवस’ व ‘संकल्प दिवस’ के रूप में मनाई जाएगी। इस ऐतिहासिक अवसर पर बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के कार्यकर्ता एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 52वीं बार अपने रक्त से पत्र लिखकर पृथक राज्य की मांग करेंगे।
दो राज्यों के 14 जिलों में गूंजेगी मांग
बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण पाण्डेय ने बताया कि आंदोलन का विस्तार अब उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सभी प्रमुख जिलों में हो चुका है। कार्यक्रम का आयोजन निम्नलिखित क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर किया जाएगा:
उत्तर प्रदेश: फतेहपुर, झांसी, जालौन, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट।
मध्य प्रदेश: छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, दमोह, सागर और दतिया।
इन सभी जनपदों के सार्वजनिक स्थलों पर समर्थक एकत्रित होंगे और सामूहिक रूप से रक्त-पत्र लिखकर केंद्र सरकार तक अपनी आवाज पहुँचाएंगे।
अब तक का सफर: राखी से लेकर जंतर-मंतर तक
आंदोलन की गंभीरता को रेखांकित करते हुए प्रवीण पाण्डेय ने साझा किया कि:
राखी-पत्र अभियान: बुंदेली बहनों द्वारा प्रधानमंत्री को एक लाख से अधिक राखियाँ भेजी जा चुकी हैं, जिसमें ‘उपहार’ के रूप में पृथक बुंदेलखंड की मांग की गई है।
दिल्ली कूच: जंतर-मंतर पर समिति द्वारा पहले ही जोरदार प्रदर्शन कर दिल्ली की सत्ता को बुंदेलखंड की शक्ति का अहसास कराया जा चुका है।
रक्त से पत्र: यह 52वां अवसर होगा जब कार्यकर्ता अपनी भावनाओं को स्याही के बजाय रक्त से पन्नों पर उतारेंगे।
‘ग्राम-ग्राम जन-संपर्क’ से युवाओं को जोड़ने की मुहिम
प्रवीण पाण्डेय के अनुसार, यह आंदोलन अब केवल रैलियों तक सीमित नहीं है, बल्कि “ग्राम-ग्राम जन-संपर्क” के माध्यम से गाँवों के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच चुका है।
“बुंदेलखंड का युवा अब अपनी शिक्षा, रोजगार और आजीविका के अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुका है। भौगोलिक और प्राकृतिक रूप से समृद्ध होने के बावजूद यह क्षेत्र पिछले 65 वर्षों से उपेक्षा का शिकार है। अब युवा वर्ग इस अन्याय के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभा रहा है।”
— प्रवीण पाण्डेय, राष्ट्रीय अध्यक्ष
शंकर भैया का विरासत और संघर्ष
स्वर्गीय शंकर लाल मेहरोत्रा ने बुंदेलखंड की विशिष्ट सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को बचाने के लिए ‘बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा’ की स्थापना की थी। उन्होंने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उन्हीं के संघर्षों को सम्मान देने के लिए समिति उनकी जयंती को संकल्प दिवस के रूप में मनाती है, ताकि पृथक राज्य का सपना साकार हो सके।








