कोलकाता। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रस्तावित ‘परिवर्तन यात्रा’ को लेकर चल रही लंबी कानूनी रस्साकशी पर शुक्रवार को विराम लग गया। कोलकाता हाई कोर्ट ने राज्य में भाजपा को यात्रा निकालने की सशर्त अनुमति प्रदान कर दी है।
अदालत का फैसला और समय सीमा
न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि भाजपा अपनी यात्रा निकाल सकती है, लेकिन इसके लिए समय और तारीख का कड़ा पालन करना होगा।
तारीख: 1 और 2 मार्च 2026।
समय: दोपहर 2:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक ही यात्रा निकालने की अनुमति होगी।
भीड़ और सुरक्षा पर सख्त निर्देश
अदालत ने अनुमति तो दे दी है, लेकिन रैलियों में होने वाली भीड़ को लेकर सख्त पाबंदी लगाई है। कोर्ट के आदेश के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
भीड़ की सीमा: किसी भी स्थान पर एक समय में 1,000 से अधिक लोगों की भीड़ इकट्ठा नहीं होनी चाहिए।
प्रशासन की जिम्मेदारी: अदालत ने निर्देश दिया है कि यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस और प्रशासन की होगी।
शांति व्यवस्था: यात्रा के मार्ग और आयोजन के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो, इसका ध्यान आयोजकों को भी रखना होगा।
क्यों अहम है यह फैसला?
बंगाल की राजनीति में ‘परिवर्तन यात्रा’ को भाजपा के चुनाव प्रचार का एक बड़ा हिस्सा माना जा रहा है। राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अनुमति में देरी की जा रही थी, जिसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुँचा था। अदालत के इस फैसले से भाजपा को बड़ी राहत मिली है, हालांकि ‘एक हजार’ की भीड़ वाली शर्त पार्टी के लिए एक चुनौती साबित हो सकती है।
कानूनी टिप्पणी: न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष की पीठ ने साफ किया कि लोकतांत्रिक अधिकारों और सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) के बीच संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है, इसीलिए ये शर्तें लगाई गई हैं।








