अभियान: “मेरी माटी–मेरा तीर्थ–मेरा फतेहपुर, मैं ही संवारूंगा” के तहत किशनपुर में जनसंपर्क
फतेहपुर। बुंदेलखंड राष्ट्र समिति द्वारा चलाए जा रहे “मेरी माटी–मेरा तीर्थ–मेरा फतेहपुर, मैं ही संवारूंगा” अभियान के तहत सोमवार को नगर किशनपुर में व्यापक जनसंपर्क किया गया। इस दौरान समिति के पदाधिकारियों ने व्यापारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों से मुलाकात कर जनपद के सर्वांगीण विकास पर चर्चा की।
स्वच्छता और जल संरक्षण को तीर्थ मानकर करें सेवा
समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पर्यावरण पहरूवा प्रवीण पांडेय ने नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि विकास केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि जनसहभागिता से आता है। उन्होंने जोर देकर कहा, “जब तक हम अपनी माटी और जल स्रोतों को तीर्थ मानकर उनके संरक्षण का संकल्प नहीं लेंगे, तब तक स्थायी विकास संभव नहीं है।” उन्होंने युवाओं से तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने और वृक्षारोपण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
13 सूत्रीय मांग पत्र जारी: फतेहपुर के विकास का रोडमैप
प्रदेश अध्यक्ष यज्ञेश गुप्ता ने बताया कि फतेहपुर को आकांक्षी जनपद का दर्जा मिलने के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। इसी क्रम में समिति ने 13 सूत्रीय मांग पत्र जारी किया है, जिसमें प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
शिक्षा: राजकीय विश्वविद्यालय, देश का पहला जल विश्वविद्यालय और गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता विश्वविद्यालय की स्थापना।
कृषि व स्वास्थ्य: शहीद ठाकुर दरियाव सिंह के नाम पर कृषि महाविद्यालय और जिला अस्पताल का उच्चीकरण।
कनेक्टिविटी: ऊंचाहार–खागा–अतर्रा–सागर रेलवे लाइन का सर्वे व बजट स्वीकृति।
प्रशासनिक: खागा को पृथक जिला बनाना और फतेहपुर को बुंदेलखंड विकास निधि से जोड़ना।
सामूहिक आवाज बना अभियान
समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि यह मांग पत्र केवल एक संगठन का नहीं, बल्कि फतेहपुर की लाखों जनता की आवाज है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य के तहत केंद्र सरकार इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी। अभियान “अपना तीर्थ – अपना दायित्व” के संकल्प के साथ निरंतर जारी है।









