फतेहपुर (उत्तर प्रदेश): जनपद में बोर्ड परीक्षाओं को पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के प्रशासनिक दावों के बीच नकल माफियाओं की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। जिले की बिंदकी और खागा तहसील के अंतर्गत आने वाले परीक्षा केंद्रों पर बाहरी ‘सॉल्वर’ बैठाकर मेधावियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस ने शिकंजा कस दिया है।
मुख्य आरोपियों का विवरण और कार्रवाई
पुलिस और शिक्षा विभाग की संयुक्त जांच के बाद प्रशासन ने मुख्य साजिशकर्ताओं को चिन्हित किया है:
राम अवतार: एक निजी इंटर कॉलेज के प्रबंधक, जिन्हें इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड माना जा रहा है।
सुनील निषाद: प्रबंधक का मुख्य सहयोगी, जो सॉल्वर और परीक्षार्थियों के बीच समन्वय का काम करता था।
अन्य: इनके अलावा 8 अन्य अज्ञात और नामजद लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम की गंभीर धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।
कैसे चल रहा था ‘नकल का काला खेल’?
जांच में सामने आया है कि आरोपी राम अवतार और सुनील निषाद ने परीक्षा केंद्र की गोपनीयता को पूरी तरह ताक पर रख दिया था। इनका काम करने का तरीका बेहद शातिर था:
बाहरी सॉल्वर: परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र की फोटो खींचकर बाहर भेजी जाती थी, जहाँ ‘सॉल्वर’ (विशेषज्ञ) उसे हल करते थे।
व्हाट्सएप सिंडिकेट: हल किए गए उत्तरों को व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से केंद्र के भीतर मौजूद सांठगांठ वाले शिक्षकों तक पहुँचाया जाता था।
उत्तर पुस्तिकाएं बदलना: कुछ मामलों में परीक्षा के बाद कॉपियों में हेरफेर करने की योजना भी प्रकाश में आई है।
प्रशासनिक रुख: ‘कठोरतम कार्रवाई होगी’
जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) और पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में गठित टीमों ने केंद्रों पर छापेमारी की थी। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नकल माफियाओं की संपत्ति कुर्क करने और उन पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
विशेष टिप्पणी: प्रशासन इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या इस गिरोह के तार जिले के अन्य बड़े परीक्षा केंद्रों से भी जुड़े हैं।








