फतेहपुर। उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार एक ओर ‘भ्रष्टाचार मुक्त’ प्रशासन और ‘रामराज्य’ जैसा सुशासन होने का दावा करती है, वहीं जमीनी हकीकत इन दावों को ठेंगा दिखा रही है। ताजा मामला जनपद के भिटौरा विकास खंड का है, जहां सरकारी धन की बंदरबांट और लोक निर्माण विभाग (PWD) की अनदेखी ने विकास के नाम पर मजाक खड़ा कर दिया है।
25 लाख की लागत, गुणवत्ता शून्य
मोहम्मदपुर कला गांव से आंबापुर हथगांव मार्ग तक करीब 1200 मीटर डामर रोड का निर्माण कार्य लगभग ₹25 लाख की लागत से कराया जा रहा है। निर्माण का जिम्मा कौशांबी के एक ठेकेदार के पास है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता का आलम यह है कि सड़क आगे-आगे बन रही है और पीछे-पीछे लोग उसे अपने हाथों से ही उखाड़ दे रहे हैं।
बिना धूल हटाए बिछा दिया डामर
ग्रामीणों द्वारा बनाए गए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि ठेकेदार ने मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए पुराने रास्ते से धूल तक नहीं हटाई और सीधे डामरीकरण कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि:
सड़क की परत इतनी पतली है कि वह पैरों के दबाव से ही उखड़ रही है।
घटिया सामग्री (रोड़ी और डामर) का प्रयोग कर सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है।
विरोध करने पर ठेकेदार ग्रामीणों को सत्ता की धौंस दिखाकर डराता-धमकाता है।
“यह विकास नहीं, विनाश है। कमीशनखोरी के खेल में अधिकारी और ठेकेदार मिलकर जनता की गाढ़ी कमाई बर्बाद कर रहे हैं।” — स्थानीय ग्रामीण
अपनों की ही नहीं सुन रही सरकार?
हैरानी की बात यह है कि इस घटिया निर्माण के खिलाफ स्वयं भाजपा के जनप्रतिनिधि भी समय-समय पर आवाज उठाते रहे हैं, लेकिन शासन और प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। मोहम्मदपुर कला के ग्राम प्रधान ने भी इस कार्य का कड़ा विरोध किया है। फतेहपुर में भ्रष्ट तंत्र और ठेकेदारों का गठजोड़ इतना मजबूत हो चुका है कि गुणवत्ता की मांग करने वालों को ही दबाया जा रहा है।
बड़ा सवाल: कब होगी कार्रवाई?
सड़क निर्माण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग की जमकर किरकिरी हो रही है। अब सवाल यह उठता है कि क्या उच्चाधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर दोषी ठेकेदार का टेंडर निरस्त करेंगे और भ्रष्टाचार में लिप्त विभागीय कर्मचारियों पर गाज गिरेगी? या फिर ‘जीरो टॉलरेंस’ का नारा सिर्फ विज्ञापनों तक ही सीमित रहेगा?








