ब्यूरो रिपोर्ट: राहुल द्विवेदी, कानपुर।
कानपुर। साइबर क्राइम थाना, कमिश्नरेट कानपुर नगर ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए मासूम लोगों को अपना शिकार बनाने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के मुख्य सरगना सहित 5 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह के तार 5 राज्यों से जुड़े हैं और अब पुलिस को इनके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन होने के भी संकेत मिले हैं।
आतंकी फंडिंग का डर दिखाकर की करोड़ों की ठगी
पकड़े गए गिरोह ने ठगी का एक खौफनाक तरीका अपनाया था। गिरोह ने एक पीड़ित को 09 अप्रैल से 21 अप्रैल तक लगातार ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। इस दौरान आरोपियों ने:
फर्जी पुलिस और एंटी करप्शन ब्यूरो का सेटअप तैयार किया।
पीड़ित को आतंकी फंडिंग के झूठे मामले में फंसाने का डर दिखाया।
मोबाइल ऐप के जरिए पीड़ित पर 24 घंटे निगरानी रखी, ताकि वह किसी से मदद न मांग सके।
भयभीत कर पीड़ित से RTGS के माध्यम से भारी भरकम धनराशि ट्रांसफर करा ली।
झारखंड का मुख्य आरोपी और CISF कर्मी का कनेक्शन
गिरफ्तार अभियुक्तों में गिरोह का मास्टरमाइंड राजू (निवासी झारखंड) शामिल है। इसके अलावा पुलिस ने उन खाताधारकों को भी दबोचा है जिनके बैंक खातों में ठगी की रकम भेजी गई थी।
चौंकाने वाला खुलासा: पूछताछ के दौरान इस गिरोह में CISF कर्मचारी दाउद अंसारी की संलिप्तता भी सामने आई है। पुलिस उसे हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है ताकि उसकी भूमिका स्पष्ट हो सके।
करोड़ों के ट्रांजेक्शन और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क
जांच में पुलिस को अब तक अभियुक्तों के खातों में लगभग ₹57 लाख के ट्रांजेक्शन मिले हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए खातों में मौजूद धनराशि को फ्रीज करवा दिया है। अभियुक्तों के पास से मोबाइल फोन और घटना में प्रयुक्त वाहन भी बरामद किए गए हैं।
पुलिस की कार्रवाई जारी
कानपुर पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का जाल केवल यूपी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह 5 राज्यों में सक्रिय है। पुलिस अब इन पैसों के उपयोग (Money Trail) और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की गहराई से जांच कर रही है। पकड़े गए अभियुक्तों के खिलाफ विधिक कार्रवाई कर उन्हें जेल भेजा जा रहा है।








