खागा, फतेहपुर। उत्तर प्रदेश सरकार भू-माफियाओं और अवैध अतिक्रमणकारियों के खिलाफ लगातार कड़े कदम उठाने के दावे कर रही है, लेकिन धरातल पर सरकारी तंत्र की सुस्ती के कारण कोर्ट के आदेशों की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ऐसा ही एक गंभीर मामला जनपद फतेहपुर की तहसील खागा के अंतर्गत नगर पंचायत करीकान द्वितीय (धाता) से सामने आया है, जहाँ तालाब की बेशकीमती भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए पक्के मकान को ढहाने (ध्वस्तीकरण) की प्रक्रिया कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद अधर में लटकी हुई है।
क्या है पूरा मामला?
राजस्व न्यायालय (तहसीलदार/असिस्टेंट कलेक्टर, खागा) में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा-67 के तहत दर्ज वाद संख्या 7157/2024 (कंप्यूटरीकृत वाद संख्या: T202402250307157) के अनुसार, ग्राम करीकान द्वितीय के गाटा संख्या 2179मि. (रकबा 1.9830 हेक्टेयर) जो कि सरकारी अभिलेखों में “तालाब खाते” की सुरक्षित भूमि है, उस पर गांव के ही निवासी हरिश्चन्द्र (पुत्र मोतीलाल) द्वारा 0.0160 हेक्टेयर क्षेत्र में अवैध रूप से पक्का मकान बनाकर कब्जा कर लिया गया।
लेखपाल और नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी (EO) की जांच में भी इस अवैध अतिक्रमण की पुष्टि हुई, जिससे ग्राम सभा/नगर पंचायत की संपत्ति को भारी क्षति पहुँची है।
कोर्ट ने दिया था बेदखली और जुर्माने का आदेश
न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 27 नवंबर 2024 को ही अंतिम आदेश पारित कर दिया था। कोर्ट के आदेशानुसार:
विपक्षी हरिश्चन्द्र को तालाब की विवादित भूमि (गाटा संख्या 2179मि.) से तत्काल बेदखल करने का आदेश दिया गया था।
अवैध अतिक्रमण करने के एवज में विपक्षी पर 30,000 रुपये क्षतिपूर्ति और 1,000 रुपये निष्पादन व्यय, यानी कुल 31,000 रुपये की वसूली का जुर्माना लगाया गया था।
आदेश की प्रति संबंधित राजस्व निरीक्षक (RI) को बेदखली की कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए भेजी गई थी।
नोटिस के बाद भी ढीला पड़ा प्रशासन, नहीं हुआ ध्वस्तीकरण
स्थानीय सूत्रों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोर्ट का स्पष्ट आदेश होने और नगर पंचायत द्वारा बार-बार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद, अतिक्रमणकारी के हौसले बुलंद हैं। विपक्षी ने न तो खुद से अवैध कब्जा हटाया और न ही प्रशासनिक अमले ने अब तक मौके पर पहुँचकर अवैध पक्के मकान को ढहाने (ध्वस्तीकरण) की हिम्मत दिखाई है।
लाखों रुपये की बेशकीमती तलाबी भूमि आज भी भू-माफिया के शिकंजे में है। कोर्ट के आदेश के महीनों बीत जाने के बाद भी कब्जामुक्त कार्रवाई न होना स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली और मिलीभगत पर बड़े सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों में आक्रोश, उच्चाधिकारियों से गुहार
तालाब की भूमि पर अवैध निर्माण के कारण जल संरक्षण और पर्यावरण को भी नुकसान पहुँच रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर कोर्ट के आदेश का भी पालन नहीं कराया जाएगा, तो आम जनता का कानून से भरोसा उठ जाएगा। ग्रामीणों ने अब इस मामले में जिलाधिकारी (DM) फतेहपुर और उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप कर तत्काल ‘बुलडोजर कार्रवाई’ (ध्वस्तीकरण) सुनिश्चित कराने की मांग की है।








