रिपोर्ट राहुल द्विवेदी कानपुर
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में साढ़-कुड़नी मार्ग पर बरईगढ़ गांव के पास एक बड़ा हादसा होने से बाल-बाल बच गया। यहाँ रामगंगा नहर पर बना ब्रिटिश शासन काल का एक ऐतिहासिक पुराना पुल रविवार तड़के अचानक बीच से टूटकर सीधे नहर में समा गया। राहत की बात यह रही कि घटना भोर (सुबह) के वक्त हुई, जब पुल पर कोई भी व्यक्ति या वाहन मौजूद नहीं था, अन्यथा एक बड़ी जनहानि हो सकती थी।
पुल ढहने की इस घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन और सिंचाई विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है।
लंबे समय से जर्जर था पुल, कटान ने खोखली की बुनियाद
स्थानीय ग्रामीणों ने इस हादसे के लिए पूरी तरह से नहर विभाग की घोर लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह पुल लंबे समय से अत्यंत जर्जर अवस्था में था, जिसके बारे में विभाग को कई बार आगाह किया गया था। इसके अलावा, नहर के किनारों पर लगातार हो रहे पानी के कटान की समस्या भी बनी हुई थी। बार-बार शिकायतें किए जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने न तो पुल की मरम्मत कराई और न ही सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम किए, जिसका नतीजा आज इस हादसे के रूप में सामने आया।
पुल के अचानक टूटने से क्षेत्र का मुख्य मार्ग बाधित हो गया, जिससे सुबह-सुबह राहगीरों और ग्रामीणों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
नहर विभाग की दलील— पानी के अत्यधिक दबाव से ढही संरचना
घटना की सूचना मिलते ही नहर विभाग के प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि रामगंगा नहर में पानी का जल प्रवाह (वॉटर डिस्चार्ज) अचानक अधिक होने के कारण सदियों पुरानी इस संरचना की नींव कमजोर हो गई थी, जिसके चलते यह दबाव नहीं झेल सकी।
प्रशासन ने स्थिति को संभालते हुए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की और पास ही निर्माणाधीन एक नए पुल से यातायात को डायवर्ट कर आवागमन बहाल कराया।
अधिकारियों का बयान और वैकल्पिक व्यवस्था
मामले की तकनीकी जानकारी देते हुए नहर विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) आशीष पाल ने बताया:
“बरईगढ़ के पास रामगंगा नहर पर बना यह पुल ब्रिटिशकालीन था और अपनी मियाद पूरी कर चुका था। पानी के अत्यधिक दबाव और तेज बहाव के कारण यह क्षतिग्रस्त होकर गिर गया। गनीमत रही कि कोई दुर्घटना नहीं हुई। वर्तमान में, इसके ठीक समीप ही लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा एक नए पुल का निर्माण कराया जा रहा है। जनता की सुविधा को देखते हुए इस नए पुल को अस्थायी रूप से चालू कर दिया गया है। जल्द ही इस पर रेलिंग लगाने का अधूरा काम भी पूरा कर लिया जाएगा ताकि सुरक्षा चाक-चौबंद रहे।”
— आशीष पाल, जूनियर इंजीनियर, नहर विभाग
जांच और कार्रवाई की मांग
भले ही प्रशासन ने नया पुल चालू कर स्थिति को संभाल लिया हो, लेकिन स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जर्जर हो चुके पुल पर समय रहते भारी वाहनों की नो-एंट्री या चेतावनी बोर्ड क्यों नहीं लगाया गया, इसकी जांच होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।








