महाघोटाला या घोर लापरवाही? असोथर मंडी में भीगा किसानों का हजारों कुंतल गेहूं, सरकारी तौल व्यवस्था की खुली पोल

  • ​समय पर खरीद न होने से किसानों में भड़का आक्रोश, बिचौलियों पर मंडी कब्जाने का आरोप
  • ​मौसम विभाग के अलर्ट के बाद भी नहीं जागे जिम्मेदार; खुले आसमान के नीचे बर्बाद हुई अन्नदाता की मेहनत

​फतेहपुर (असोथर)। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद अंतर्गत असोथर मंडी से सरकारी दावों की हवा निकालने वाली एक बेहद परेशान करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ सरकारी खरीद केंद्रों की सुस्त कार्यप्रणाली और घोर प्रशासनिक लापरवाही के चलते खुले आसमान के नीचे रखा हजारों कुंतल गेहूं हालिया बारिश में पूरी तरह भीग गया। इस घटना से आक्रोशित किसानों ने मंडी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और तौल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

​खुले आसमान के नीचे सड़ रहा अन्न, मौसम विभाग की चेतावनी भी की दरकिनार

​मंडी परिसर में अपनी उपज बेचने आए किसानों का आरोप है कि वे कई दिनों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन पर्याप्त कांटों (तौल व्यवस्था) और मुस्तैद कर्मचारियों के न होने के कारण खरीद की रफ्तार कछुआ गति से चल रही है।

​हैरानी की बात यह है कि मौसम विभाग द्वारा पहले ही बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया था। इसके बावजूद मंडी प्रशासन ने अनाज को सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल या ढके हुए भंडारण (Shed) की कोई व्यवस्था नहीं की। नतीजतन, अन्नदाता की महीनों की खून-पसीने की कमाई पानी में बह गई, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

​किसानों का दर्द: “हम हफ़्तों से यहाँ ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर लाइन में खड़े हैं। हमारी तौल नहीं की जा रही और जब बारिश आई तो हमारी फसल को बचाने के लिए मंडी में एक तिरपाल तक नसीब नहीं हुआ। अब इस भीगे हुए गेहूं को कौड़ियों के दाम पर बेचने की नौबत आ जाएगी।”

 

​असली किसान कतार में, बिचौलियों का मंडी पर कब्जा!

​मंडी में मौजूद पीड़ित किसानों ने स्थानीय प्रशासन और विपणन विभाग पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि मंडी परिसर में वास्तविक किसानों की जगह बिचौलियों और आढ़तियों का बोलबाला है।

​आरोप है कि कुछ रसूखदार बिचौलियों ने पहले से ही पन्नियां और बोरियां डालकर मंडी के मुख्य हिस्सों पर कब्जा कर रखा है। अधिकारियों और कर्मचारियों की साठगांठ से उनकी फसलें पहले तौली जा रही हैं, जबकि दूर-दराज के गांवों से आए गरीब और वास्तविक किसानों को जानबूझकर परेशान और लेट-लतीफ किया जा रहा है।

​सवालों के घेरे में अफसर: कैमरे और जवाब से भाग रहे जिम्मेदार

​इस महालापरवाही और किसानों के आरोपों पर जब ग्राउंड जीरो से मंडी प्रशासन और संबंधित क्रय केंद्र के अधिकारियों का पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो ज़िम्मेदार कैमरे के सामने आने से कतराते नजर आए। अधिकारियों ने मामले पर पूरी तरह चुप्पी साध ली है और कोई भी आधिकारिक बयान देने से इनकार कर दिया। अधिकारियों का यह रवैया साफ दर्शाता है कि कहीं न कहीं पर्दे के पीछे सच को छुपाने की कोशिश की जा रही है।

​सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, उठ रहे तीखे सवाल

​असोथर मंडी में तैरते हुए गेहूं और भीगती हुई बोरियों के वीडियो और तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। स्थानीय किसान संगठनों और आम जनता ने इस घटना को लेकर सरकार और जिला प्रशासन को घेरना शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि एक तरफ सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ फतेहपुर का प्रशासन किसानों की तैयार फसल को सुरक्षित रखने में भी नाकाम साबित हो रहा है।

​इंडिया वार्ता विशेष टिप्पणी:

असोथर मंडी का यह मामला सिर्फ एक केंद्र की लापरवाही नहीं है, बल्कि यह यूपी की कृषि खरीद व्यवस्था में पैठे भ्रष्टाचार और सिंडिकेट की पोल खोलता है। अब देखना यह है कि फतेहपुर जिला प्रशासन और जिलाधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर लापरवाह अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करते हैं और पीड़ित किसानों के नुकसान की भरपाई कैसे की जाती है।

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Author: India Varta News

Mohit Chakraborty is the Founder and Editor-in-Chief of India Varta News. He is actively involved in journalism and social service from Fatehpur, Uttar Pradesh. His mission is to deliver unbiased, factual, and public-interest journalism while highlighting local, regional, and national issues. He believes that media is a powerful tool for positive social change.

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