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लखनऊ | (विशेष संवाददाता)
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को एक और बड़ा झटका लगा है। बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री और मायावती के सबसे भरोसेमंद रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी आज औपचारिक रूप से समाजवादी पार्टी (सपा) में शामिल हो गए।
अखिलेश यादव की मौजूदगी में ली सदस्यता
राजधानी लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर अखिलेश यादव ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि उनके आने से पार्टी को न केवल मजबूती मिलेगी, बल्कि प्रदेश में सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ाई और तेज होगी।
मायावती के कभी ‘दाएं हाथ’ थे सिद्दीकी
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का सपा में जाना बसपा के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। एक दौर में सिद्दीकी बसपा के सबसे बड़े मुस्लिम चेहरे थे और मायावती के बाद पार्टी में नंबर दो की हैसियत रखते थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मुस्लिम मतदाताओं के बीच उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है।
बदलेगा सियासी समीकरण?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी की सपा में एंट्री से:
मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण: सपा की तरफ मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव और अधिक बढ़ सकता है।
पश्चिमी यूपी में मजबूती: सिद्दीकी का अपना एक बड़ा जनाधार है, जिसका लाभ सपा को आगामी चुनावों में मिल सकता है।
बसपा की घेराबंदी: बसपा के पुराने और जमीनी नेताओं का टूटना पार्टी के लिए चिंता का विषय है।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का बयान: “सपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो किसानों, नौजवानों और अल्पसंख्यकों के हक की लड़ाई ईमानदारी से लड़ रही है। अखिलेश यादव के नेतृत्व में प्रदेश का विकास संभव है।”








