
नई दिल्ली।
क्लाउड सुरक्षा की वैश्विक दिग्गज कंपनी ज़ीस्केलर इंक (Zscaler Inc.) और भारत की प्रमुख दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल ने देश के डिजिटल ढांचे को सुरक्षित बनाने के लिए हाथ मिलाया है। दोनों कंपनियों ने मिलकर ‘AI एंड साइबर थ्रेट रिसर्च सेंटर – इंडिया’ की शुरुआत करने की घोषणा की है। यह केंद्र भारत की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने और बैंकिंग, ऊर्जा एवं दूरसंचार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को साइबर हमलों से बचाने के लिए समर्पित होगा।
क्यों पड़ी इस रिसर्च सेंटर की जरूरत?
भारत में डिजिटल सिस्टम अब आबादी के स्तर पर विकसित हो रहे हैं। ज़ीस्केलर की रिसर्च यूनिट ‘थ्रेटलैब्ज इंडिया’ के आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
लाखों घुसपैठ की कोशिशें: हर महीने भारतीय संस्थाओं पर लाखों साइबर हमले दर्ज किए जा रहे हैं।
बढ़ते खतरे: अकेले 58 डिजिटल संस्थाओं को निशाना बनाने के लिए 20,000 स्रोतों से 12 लाख घुसपैठ के प्रयास हुए।
AI का दुरुपयोग: हमलावर अब AI का उपयोग कर चंद मिनटों में सिस्टम की कमियां ढूंढ रहे हैं।
दिग्गजों ने क्या कहा?
भारती एयरटेल के एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन, गोपाल विट्टल ने इस साझेदारी पर खुशी जताते हुए कहा:
“हमारी प्रतिबद्धता देश के डिजिटल ढांचे की सुरक्षा को लेकर है। ज़ीस्केलर के साथ मिलकर हम अपनी AI क्षमता का उपयोग करेंगे ताकि एक सुरक्षित डिजिटल भारत बनाया जा सके, जहाँ हर संस्थान भरोसे के साथ आगे बढ़ सके।”
ज़ीस्केलर के सीईओ और संस्थापक, जय चौधरी ने पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियों पर सवाल उठाते हुए कहा:
“भारत जिस बड़े पैमाने पर डिजिटल सिस्टम बना रहा है, उसे पुराने फायरवॉल या वीपीएन से सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। इसके लिए आधुनिक ‘जीरो ट्रस्ट’ संरचना अनिवार्य है, जो शुरुआत से ही सुरक्षित हो।”
रिसर्च सेंटर के 4 मुख्य स्तंभ
यह केंद्र “इन इंडिया, फॉर इंडिया” (भारत में, भारत के लिए) की सोच पर काम करेगा:
सुरक्षा: डिजिटल व्यवसायों को वास्तविक समय में खतरे की जानकारी देना।
निवारण: साइबर हमलों को रोकने के लिए सरकारी एजेंसियों के साथ सीधे साझेदारी।
सुविधा: आधुनिक AI आधारित सुरक्षा उपायों और जीरो ट्रस्ट ढांचे को बढ़ावा देना।
निर्माण: साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार करने के लिए सर्टिफिकेशन प्रोग्राम चलाना।
साझेदारी की ताकत
ज़ीस्केलर का ‘जीरो ट्रस्ट एक्सचेंज™’ प्लेटफॉर्म हर दिन 500 अरब से अधिक ट्रांजेक्शन प्रोसेस करता है। इस वैश्विक डेटा को एयरटेल के स्थानीय नेटवर्क अनुभव (IoT और मोबाइल ट्रैफिक) के साथ जोड़ा जाएगा। इससे संदिग्ध गतिविधियों की पहचान बेहद तेजी से हो सकेगी। भविष्य में इस केंद्र से अन्य महत्वपूर्ण सरकारी और निजी संस्थाओं को भी जोड़ने की योजना है।








