
असोथर (फतेहपुर)। जिले के असोथर कस्बे में इन दिनों विकास नहीं, बल्कि मौत का सामान सड़कों पर दौड़ रहा है। ईंटों से ओवरलोड लदे ट्रैक्टर-ट्रॉलियां कस्बे की मुख्य सड़कों और तंग गलियों में कहर बरपा रहे हैं। सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि यूपी बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं और इन बेकाबू ट्रैक्टरों की वजह से मासूम छात्र-छात्राओं की जान जोखिम में है।
ओवरलोडिंग और रफ्तार: हादसे को खुली दावत
स्थानीय लोगों के मुताबिक, एक-एक ट्रॉली में 5 से 6 हजार ईंटें लादी जा रही हैं, जो ट्रैक्टर की निर्धारित क्षमता से कहीं ज्यादा है। क्षमता से अधिक भार होने के कारण ये ट्रैक्टर असंतुलित होकर तेज रफ्तार में निकलते हैं। बांदा जिले की ओर जा रहे इन ‘यमदूतों’ के कारण कस्बे की संकरी सड़कों पर पैदल चलना भी दूभर हो गया है।
परीक्षा के समय बढ़ जाती है दहशत
वर्तमान में माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाएं जारी हैं। सुबह और दोपहर के समय जब छात्र अपने परीक्षा केंद्रों की ओर निकलते हैं, तब इन भारी वाहनों का जमावड़ा लग जाता है।
जाम की समस्या: स्कूल की छुट्टी के समय भारी जाम लग जाता है।
खतरे में बच्चे: बच्चों को अपनी जान बचाकर ट्रैक्टरों के बगल से कीचड़ और गड्ढों में होकर गुजरना पड़ता है।
धूल और शोर: ओवरलोड वाहनों से उड़ती धूल और शोर ने परीक्षार्थियों की एकाग्रता और स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाला है।
पुलिस और प्रशासन क्यों है मौन?
कस्बे के व्यापारियों और ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस और परिवहन विभाग इस बड़ी लापरवाही पर आंखें मूंद कर बैठा है। शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। लोगों का कहना है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
इंडिया वार्ता न्यूज़ की मांग
स्थानीय नागरिकों के सुर में सुर मिलाते हुए इंडिया वार्ता न्यूज़ प्रशासन से मांग करता है कि:
रूट डायवर्जन: बोर्ड परीक्षा के दौरान कस्बे के अंदर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए।
सख्त चेकिंग: ओवरलोड ईंट लदे ट्रैक्टरों का चालान कर उन्हें सीज किया जाए।
बाईपास का उपयोग: ट्रकों और ट्रैक्टरों के लिए वैकल्पिक मार्ग सुनिश्चित किया जाए।
सावधान रहें, सुरक्षित रहें! यदि आपके क्षेत्र में भी ऐसी समस्या है, तो हमें कमेंट में बताएं।








