खागा (फतेहपुर): उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्रा की निर्मम हत्या के विरोध में तहसील खागा के अधिवक्ताओं में भारी रोष व्याप्त है। मॉडल बार एसोसिएशन खागा के बैनर तले सैकड़ों वकीलों ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार करते हुए विरोध प्रदर्शन किया और राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी (SDM) को सौंपा।
क्या है पूरा मामला?
बीती 22 फरवरी 2026 को अवध बार लखनऊ में कार्यरत वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्रा की लोहे की रॉड और लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस दुस्साहसिक वारदात ने प्रदेश के कानूनी जगत को झकझोर कर रख दिया है। वकीलों का आरोप है कि प्रदेश में अधिवक्ता सुरक्षित नहीं हैं और प्रशासन अपराधियों पर लगाम लगाने में विफल साबित हो रहा है।
अधिवक्ताओं की प्रमुख मांगें
मॉडल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में सरकार के सामने चार मुख्य शर्तें रखी गई हैं:
आर्थिक सहायता: मृतक के परिजनों को तत्काल ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए।
सरकारी नौकरी: परिवार के एक आश्रित सदस्य को योग्यता अनुसार सरकारी सेवा में लिया जाए।
सुरक्षा की गारंटी: पीड़ित परिवार की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
Advocates Protection Act: उत्तर प्रदेश में तत्काल प्रभाव से ‘अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम’ लागू किया जाए।
“निरंकुश प्रशासन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई”
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने कहा कि प्रदेश में वकीलों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे न्याय प्रणाली से जुड़े लोगों में भय का माहौल है। वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही सुरक्षा कानून लागू नहीं हुआ और दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिली, तो यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा।
उपस्थिति: इस मौके पर महामंत्री मलखान सिंह यादव, रामसखा द्विवेदी, अजय त्रिपाठी, वीरेंद्र सिंह तोमर, अरविंद कुमार पांडे, पूर्व महामंत्री धर्मेंद्र सिंह, बांकनाथ गोस्वामी, मो. यूसुफ, लोधी लक्ष्मी देवी, संजय सिंह, इसराइल फ़ारूक़ी समेत भारी संख्या में कार्यकारिणी सदस्य और अधिवक्ता मौजूद रहे।








