असोथर फतेहपुर। सिंचाई विभाग की अनदेखी और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया असोथर का बैरहना गांव। जहाँ नहर की खांधी टूटने से महज कुछ घंटों के भीतर पूरा इलाका टापू में तब्दील हो गया। इस हादसे ने जहाँ 100 बीघा फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है, वहीं ग्रामीणों के आशियानों को भी नुकसान पहुँचाया है।
क्या प्रशासन गहरी नींद में था?
नहर की पटरियों की मरम्मत के नाम पर हर साल लाखों का बजट आता है, लेकिन बैरहना की घटना ने कागजी दावों की पोल खोल दी है। ग्रामीणों का कहना है कि खांधी पहले से ही कमजोर थी, जिसकी सूचना के बावजूद विभाग ने उसे दुरुस्त करने की जहमत नहीं उठाई। नतीजा आज सबके सामने है—किसानों की साल भर की कमाई और निवाला पानी में बह चुका है।
बैरहना में जल प्रलय जैसे हालात
घरों में कैद हुए लोग: गलियों में घुटनों तक पानी होने के कारण लोगों का घरों से निकलना दूभर हो गया है।
बर्बाद हुए खेत: 100 बीघा खेतों में पानी भर जाने से मिट्टी की उर्वरता और फसलों को अपूरणीय क्षति हुई है।
भूख का संकट: घरों के अंदर रखा अनाज और भूसा भीग जाने से मवेशियों और इंसानों, दोनों के लिए चारे और भोजन का संकट खड़ा हो गया है।
दोषियों पर कब होगी कार्रवाई?
ग्रामीण अब सीधे तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और तत्काल मुआवजे की मांग कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन पीड़ित किसानों के आंसू पोंछने के लिए आगे आएगा या कागजी खानापूर्ति कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?








