फतेहपुर (असोथर)। जनपद के असोथर क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए मोरंग माफियाओं का ‘खूनी खेल’ जारी है। मर्का खण्ड-3 में संचालित पहलवान ट्रेडर्स प्राइवेट लिमिटेड की खदान से निकलने वाले ओवरलोड ट्रक अब आम जनता की जान के दुश्मन बन चुके हैं। गैर जनपद की खदान से निकले ये ट्रक फतेहपुर की सीमाओं में घुसते ही नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं।
पहचान छिपाने का ‘गंदा खेल’
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि सड़कों पर दौड़ रहे दर्जनों ट्रकों की नंबर प्लेटों पर कालिख या पेंट पोत दिया गया है। कई ट्रक तो बिना नंबर प्लेट के ही धड़ल्ले से चल रहे हैं। यह अपराधियों की एक सोची-समझी साजिश है ताकि किसी भी हादसे के बाद वाहन की पहचान न हो सके। आखिर परिवहन विभाग इन ‘बेनाम’ मौत के सौदागरों को रोकने में नाकाम क्यों है?
धूल के गुबार में घुटता दम
दिखावे के लिए ट्रकों पर डाली गई तिरपाल धूल रोकने में पूरी तरह विफल है। असोथर की सड़कों पर दिनभर उड़ने वाली मोरंग की धूल ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। स्कूली बच्चे और बुजुर्ग फेफड़ों की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। राहगीरों और स्थानीय दुकानदारों के लिए सांस लेना भी दूभर हो गया है।
प्रशासनिक मिलीभगत की बू?
स्थानीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि बिना प्रशासनिक संरक्षण के इतना बड़ा अवैध खेल संभव नहीं है। खनिज विभाग और स्थानीय पुलिस की चुप्पी यह इशारा करती है कि कहीं न कहीं माफियाओं को ‘अभयदान’ मिला हुआ है। संकरी गलियों और बाजारों से गुजरते ये ओवरलोड वाहन किसी भी वक्त बड़ी लाशें बिछा सकते हैं।
मुख्य मुद्दे:
गैर जनपद की खदान: पड़ोसी जिले की खदान से असोथर तक माफिया का तांडव।
नंबर प्लेट का फर्जीवाड़ा: कालिख पुते ट्रकों से बढ़ी दुर्घटना और अपराध की आशंका।
नियमों का उल्लंघन: ओवरलोडिंग पर न तो जुर्माना लग रहा है और न ही सीजिंग की कार्रवाई हो रही है।
हमारा सवाल: क्या प्रशासन को किसी मासूम की जान जाने का इंतजार है? क्या मुख्यमंत्री के ‘जीरो टॉलरेंस’ निर्देशों का फतेहपुर में कोई मोल नहीं है?









