नई दिल्ली: कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के मामले में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के रुख पर कड़ा प्रहार किया है। सोनिया गांधी ने सरकार की ‘खामोशी’ पर सवाल उठाते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत की बड़ी चूक करार दिया है।
‘मंजूरी देने जैसा है भारत का मौन’
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित एक ओपिनियन एडिटोरियल (Op-ed) में सोनिया गांधी ने लिखा कि ईरान जैसी महत्वपूर्ण घटना पर भारत का कोई जवाब न देना केवल तटस्थता नहीं, बल्कि “कर्तव्यहीनता” है। उन्होंने तर्क दिया कि नई दिल्ली की यह चुप्पी इस दुखद घटना को एक तरह से “परोक्ष (मौन) मंजूरी” देने जैसा इशारा है।
अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में बड़ी दरार
सोनिया गांधी ने लेख में जोर देकर कहा कि मौजूदा वैश्विक बातचीत और कूटनीति के बीच एक वर्तमान राष्ट्राध्यक्ष की हत्या अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक गहरी दरार को दर्शाती है। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि जहां पूरी दुनिया इस घटना के प्रभाव को लेकर स्तब्ध है, वहीं भारत सरकार का इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया न देना चिंताजनक है।
मुख्य बातें:
सोनिया का आरोप: सरकार की चुप्पी रणनीतिक तटस्थता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से भागना है।
वैश्विक प्रभाव: एक राष्ट्राध्यक्ष की हत्या अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संबंधों के लिए बड़ा खतरा।
भारत की भूमिका: सोनिया गांधी के अनुसार, नई दिल्ली को इस संवेदनशील मुद्दे पर मुखर होना चाहिए था।








