मिडल ईस्ट संकट: खाड़ी देशों के प्रमुखों से बोले पीएम मोदी— ‘वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता’

नई दिल्ली: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर की गई संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में गहराते तनाव के बीच भारत ने कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को खाड़ी क्षेत्र के दो महत्वपूर्ण देशों—ओमान और कुवैत—के शीर्ष नेताओं से फोन पर लंबी बातचीत की।

क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा पर चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक और कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबा अल-खालिद से अलग-अलग बातचीत की। चर्चा के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:

बढ़ता तनाव: पीएम मोदी ने क्षेत्र में हो रहे हमलों और तेजी से बिगड़ते सुरक्षा हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त की।

भारतीय समुदाय की सुरक्षा: खाड़ी देशों में लाखों की संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से इन देशों के नेताओं से वहां रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने पर चर्चा की।

शांति की अपील: भारत ने हमेशा की तरह इस बार भी बातचीत और कूटनीति के जरिए शांति बहाली के पक्ष को दोहराया।

जॉर्डन के किंग से भी हुआ संवाद

मंगलवार की इस वार्ता से पहले, सोमवार को भी प्रधानमंत्री ने जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय से फोन पर संपर्क किया था। इस बातचीत के बाद पीएम मोदी ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया:

“मैंने जॉर्डन के राजा किंग अब्दुल्ला द्वितीय से बातचीत की और क्षेत्र में तेजी से बदलते घटनाक्रम पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। हमने शांति और सुरक्षा के प्रति अपने समर्थन की पुष्टि की है।”

पीएम मोदी ने इस संकट की घड़ी में जॉर्डन में रह रहे भारतीयों का ख्याल रखने के लिए किंग अब्दुल्ला का आभार भी जताया।

भारत की चिंताएं क्यों हैं अहम?

पश्चिम एशिया में अस्थिरता भारत के लिए दो बड़े कारणों से चिंता का विषय है:

प्रवासी भारतीय: खाड़ी देशों में रहने वाले लगभग 90 लाख भारतीय देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।

ऊर्जा सुरक्षा: भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है।

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Author: India Varta News

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