कानपुर। उत्तर प्रदेश की कानपुर पुलिस में उस वक्त हड़कंप मच गया जब पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने विभाग के भीतर छिपे ‘विभीषणों’ पर कड़ा प्रहार किया। जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को पलीता लगाने वाले और गांजा-चरस तस्करों को संरक्षण देने वाले 4 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है। इन पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि ये छापेमारी की गुप्त सूचना तस्करों तक पहुँचाते थे।
इन पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज (नाम सहित)
पुलिस कमिश्नर की जांच में दोषी पाए जाने के बाद जिन चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया है, उनके नाम और पद इस प्रकार हैं:
मुख्य आरक्षी (Head Constable) अवधेश सिंह
आरक्षी (Constable) सुनील कुमार
आरक्षी (Constable) विमलेश यादव
आरक्षी (Constable) प्रदीप सिंह
ये सभी पुलिसकर्मी कानपुर के चकेरी और महाराजपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न बीटों में तैनात थे। जांच में इनके मोबाइल कॉल डिटेल्स (CDR) से पुष्टि हुई है कि ये चिन्हित ड्रग तस्करों के साथ नियमित संपर्क में थे।
कैसे हुआ इस ‘काले खेल’ का खुलासा?
पिछले कुछ दिनों से कानपुर पुलिस द्वारा नशा तस्करों के ठिकानों पर की जा रही छापेमारी लगातार फेल हो रही थी। पुलिस के पहुँचने से चंद मिनट पहले ही तस्कर मौके से माल समेटकर फरार हो जाते थे। इस पर पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने एक गोपनीय जांच टीम गठित की।
जांच में सामने आया कि ये चार पुलिसकर्मी जैसे ही थाने से रेड की सूचना पाते थे, तुरंत तस्करों को फोन या मैसेज के जरिए ‘टिप’ दे देते थे। इसके बदले में इन पुलिसकर्मियों को तस्करों से मोटी रकम (प्रोटेक्शन मनी) मिलती थी।
कमिश्नर का सख्त रुख: “विभागीय जांच और जेल भी होगी”
पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया है कि केवल निलंबन ही काफी नहीं है। इन चारों के खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Inquiry) शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा, “अपराधियों से साठगांठ करने वाले पुलिसकर्मी वर्दी के लायक नहीं हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर इनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर जेल भी भेजा जा सकता है।”
इलाके में चर्चा और असर
इस कार्रवाई के बाद कानपुर पुलिस के अन्य थानों में भी हड़कंप मचा हुआ है। जहाँ जनता पुलिस कमिश्नर के इस साहसिक कदम की तारीफ कर रही है, वहीं अवैध कारोबारियों में अब पुलिस की ‘असली’ रेड का खौफ पैदा हो गया है।








